
Indian javelin throw athlete Sundar Singh Gurjar
जोधपुर. बचपन से ही मेरा सपना आर्मी में जाने का था। इसके लिए कड़ी मेहनत के साथ खेलों में भी दमखम के साथ तैयारी किया करता था। आर्मी में ट्रायल देने के बाद चयन भी हो गया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
वर्ष 2015 में हुए भवन निर्माण के दौरान हुए हादसे में बाएं हाथ का पंजा टूट गया। इस हादसे से मैं इतना स्तब्ध रह गया कि मुझे लगा मेरी तो दुनिया ही खत्म हो गई है। मैं पूरी तरह से टूट चुका था। इसी के चलते दो माह तक घर से बाहर ही नहीं निकल पाया, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। इस हादसे के बाद मेरी नई जिंदगी शुरू हुई। कोच महावीर सैनी सहयोग व दोस्तों के मोटिवेशन से आज इस मुकाम पर पहुंच पाया। यह कहना हैं भारत के भाला फेंक एथलिट सुंदरसिंह गुर्जर का।
वे शहर के गौशाला मैदान में शुरू होने जा रही राज्य स्तरीय पैराखेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए जोधपुर आए हैं। उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन कड़ी मेहनत से ही सफलता अर्जित की जा सकती है।
ओलंपिक में बढ़ाउंगा तिरंगे का मान
वर्ष 2020 के टोक्यो ओलंपिक की तैयारी पर बात करते हुए कहा कि वर्ष 2016 में वह भले ही ओलंपिक से कॉल रूम में लेट एंट्री के चलते बाहर हो गए, लेकिन उसकी कसर अब इस ओलंपिक में पूरी करके रहूंगा। कड़ी तैयारी, मेहनत व आप सभी की दुआओं की बदौलत इस बार ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत तिरंगे का मान बढ़ाउंगा। गौरतलब है कि गुर्जर को रियो ओलंपिक में टॉप करने के बावजूद बिना मेडल के ही घर जाना पड़ा था। इसकी वजह उनका प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन्होंने अनाउंसमेंट कॉल सुनने में ५२ सैंकेड देर कर दी थी। इस कारण उन्हें इवेंट से डिस्क्वालिफाई घोषित कर दिया गया था।
विश्व चैंपियनशिप में दो बाद जीता गोल्ड
रियो में हुई घटना के बाद भी सुंदर के कदम नहीं डगमगाए। इसके अगले वर्ष लंदन में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो एफ-46 में अपना बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता। सुंदर ने इस दौरान 60.36 मीटर के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 में दुबई में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीता। वर्ष 2019 में केंद्र सरकार की ओर से अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर एवं ब्रॉंज मेडल जीत चुके हैं।
राज्य में खेलों को लेकर बदला माहौल
राज्य में अब खेलों को लेकर माहौल जबरदस्त बदला है। हाल ही में राज्य सरकार ने प्रदेश के राष्ट्रीय खिलाडिय़ों के लिए सरकारी नौकरियों में दो प्रतिशत आरक्षण के नियमों में संशोधन किया। राज्य के मूल खिलाडिय़ों को इसके जरिए राष्ट्रीय गेम्स में भाग लेने पर भी दो फीसदी आरक्षण मिल सकेगा। इससे हजारों पैरा खिलाडि़यों को नौकरी का सपना साकार होगा। मेरी नजर में यह खेल मंत्री अशोक चांदना का सराहनीय फैसला है। क्योंकि पहले पैरा खिलाड़ी को नेशनल लेवल पर विनर बनने पर भी अलग से कोटा निर्धारित नहीं था। खेल मंत्री ने नकद राशि भी बढ़ाई है।
Published on:
28 Feb 2020 04:12 pm
