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किस्मत ने बेटा छीना तो कई बेटे-बेटियों की जिंदगी संवारने का उठाया बीड़ा

-मानव सेवा ग्रुप की मानवता समाज में बनी वरदान की मिसाल-जरूरतमंदों के काम आ रहे जगदीश माथुर
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किस्मत ने बेटा छीना तो कई बेटे-बेटियों की जिंदगी संवारने का उठाया बीड़ा

किस्मत ने बेटा छीना तो कई बेटे-बेटियों की जिंदगी संवारने का उठाया बीड़ा

एमआई जाहिर/जोधपुर. मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए...। मन में किसी के काम आने का जज्जा, जोश और कुछ अच्छा सकारात्मक व नया करने का जुनून हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। शहर की एेसी ही जियाली शख्सियत हैं रेलवे से रिटायर्ड ऑफिसर जगदीश माथुर। जब एक रोड एक्सीडेंट ने उनके बेटे की जिंदगी छीन ली तो उन्होंने दूसरों के बच्चों को अपना समझ कर उनकी जिंदगी संवारने और निखारने का बीड़ा उठाया। उन्होंने जरूरतमंद कई बेटे बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी फीस का इंतजाम किया और रोजगारोन्मुखी शिक्षादिलवाने में सहयोग किया। अब उन्होंने सेवा के इस कार्य में कुछ और साथियों को भी जोड़ लिया है।

सोशल सर्विस का मैनेजमेंट
जगदीश माथुर ने बताया कि उन्होंने मानव सेवा गु्रप बना कर सेवा के इस कार्य को विस्तार दिया। इस गु्रप की करीब १२ बरस पहले स्थापना हुई थी। ग्रप में जगदीश माथुर समन्वयक और मनोजपुरी व गुलशन सह समन्वयक हैं। गु्रप के सदस्य अपनी आमदनी में से कुछ राशि संस्था के समन्वयक को देते हैं। समन्वयक यह राशि जरूरतमंदों की जरूरत के हिसाब से उनके कल्याण के लिए उपयोग में लेते हैं।

एेसे काम आता है इनका पैसा :
-४.३० हजार रुपए पिछले साल एकत्र हुए।
-१२ बच्चों की शिक्षा का प्रबंध पर।
- ४ परिवारों की राशन सामग्री का इंतजाम पर।
- ५ संस्थाएं एेसी जो कैंसर और एड्स रोगियों के लिए काम कर रही हैं।

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