
मजबूरी की सरहद में जकड़ी ‘जनता’ ने ऐसे देखा अपने चांद को
अविनाश केवलिया. जोधपुर.
10 साल में यह पहला मौका है जब जनता माली ने अपने पति से अलग रहकर करवा चौथ मनाई है। वीडियो कॉल के जरिये पाकिस्तान में बैठी जनता माली ने हिंदुस्तान में बैठे अपने चांद के दर्शन किए। यह इसलिए हुआ क्योंकि पिछले चार माह में हिंदुस्तान वापसी की उसकी उम्मीदें कई बार धराशाही होती गई।
लीलाराम माली इसी वर्ष फरवरी माह में अपनी पत्नी जनता माली व तीन बच्चों के साथ पाकिस्तान के मीर खासपुर गया था। जनता माली मूलत: पाकिस्तान की है और शादी लीलाराम से होने के बाद 10 साल से जोधपुर में रह रही थी। लेकिन उसे भारतीय नागरिकता नहीं मिली। पाकिस्तान में जनता माली की मां की तबीयत खराब थी जिसकी कुशलक्षेम पूछने के लिए पूरा परिवार गया था। इस बीच कोरोना के कारण भारत-पाक के बीच चलने वाली ट्रेन बंद हो गई। वीजा क लीलाराम जुलाई माह में तीन बच्चों को लेकर एक हिंदुस्तान आ गए। लेकिन उनकी पत्नी की वापसी नहीं हो सकी।
नोरी वीजा की अवधि हो गई समाप्त
लीलाराम और उसके तीन बच्चों को रिटर्न वीजा दिया गया, जबकि उनकी पत्नी जनता माली जो कि पाकिस्तानी नागरिक है उसे नोरी वीजा दिया गया। इसमें यदि तय अवधि में वह वापस आती है तो वह स्वीकार्य है। लेकिन लॉकडाउन के कारण उनका परिवार तय अवधि में वापस नहीं आया और नोरी वीजा की अवधि समाप्त हो गई।
अब चक्कर काट कर परेशान
लीलाराम के उनके पुत्र कुलदीप, मोहित और सबसे छोटी बेटी कंचन अपनी मां को वापस हिंदुस्तान लाने के लिए गुहार लगा रहे हैं। राजस्थान सरकार ने इसके लिए भारत सरकार को पत्र भेजे, लेकिन कोई मदद नहीं हुई। हाल ही में 340 लोग जो नोरी वीजा पर पाकिस्तान गए थे उनकी वापसी हो गई, लेकिन जनता माली वापस नहीं आ सकी।
इनका कहना है...
इस गरीब परिवार की जनता माली को अपने परिवार से मिलाने के लिए हमने मांग उठाई और उसके बाद प्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार को लिखा। न्यायालय ने भी केन्द्र सरकार से पूछा है। नोरी वीजा पर गए सभी को वापस लाने के आदेश जारी किए फिर सिर्फ जोधपुर की जनता माली का नहीं आना कोई निहित स्वार्थ की ओर इशारा कर रहा है।
- हिंदू सिंह सोढ़ा, अध्यक्ष, सीमांत लोक संगठन
Published on:
05 Nov 2020 11:44 pm
