
मानव प्रकृति का दोहन कर प्रलय को न्यौता दे रहा
जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के हिंदी व पत्रकारिता विभाग के संयुक्त तत्वाधान में जयशंकर प्रसाद की कालजयी कृति कामायनी विषय पर 28वीं व्याख्यानमाला आयोजित की गई।
मुख्य वक्ता सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के कुलपति डॉ सुरेंद्र दुबे ने जल प्लावन की कथा के माध्यम से वर्तमान में प्रकृति के रूप में हो रहे शोषण पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय का मानव प्रकृति के संरक्षण की बात ना कर उससे दोहरा शोषण कर प्रलय को न्यौता दे रहा है। उन्होंने कहा कि मानवता विश्व विजयिनी तभी बनेगी जब वह समरस होकर संतुलित व सामंजस्य को लेकर जड़-चेतन, ह्दय-बुद्धि, दैवीय-मानवीय संस्कृति के प्रति समभाव रखेगी। अतिशय बौद्धिकता, भौतिकता व यांत्रिकता की समस्या का समाधान सभी को सुखी बनाकर करेगी।
मुख्य संरक्षक जेएनवीयू कुलपति प्रो पीसी त्रिवेदी जी ने इस व्याख्यान में प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने की बात की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति की पूर्णता को क्षति न पहुंचे। सभी को जिम्मेदारी लेनी होगी। प्रकृति ही हमारे अस्तित्व को बनाए रखती हैं ।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ नरेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रसाद जी को शब्दों में बांधना मुश्किल है क्योंकि प्रसाद जी की सीमा अनंत है। तकनीकी प्रभारी डॉ मीता सोलंकी ने संवाद कार्यक्रम को जीवंत बनाया। संचालन डॉ कामिनी ओझा ने किया। संयोजक डॉ विनीता चौहान ने किया।
इस व्याख्यान में भारतीय हिंदी परिषद् के सभापति प्रो नंदकिशोर पांडेय, प्रो अवधेश कुमार, प्रो. अलका पांडेय, प्रो. शिवप्रसाद शुक्ल,डॉ. नीतू परिहार, डॉ. रामकिंकर पांडेय, डॉ. महीपाल सिंह, डॉ. दमयंती तिवारी. डॉ. दीपिका विजयवर्गीय, डॉ. अचला पांडेय, प्रो. सत्येंद्र शर्मा, प्रो. प्रत्यूष दुबे, डॉ. बहादुर सिंह परमार, डॉ. नीलम राठी,डॉ. दर्शन पांडेय, डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’,डॉ. ज्योति सिंह, कला संकाय के डीन, डॉ किशोरी लाल रैगर, डॉ हेमन्त शर्मा,डॉ श्रवण कुमार, डॉ. कमला चौधरी, डॉ. फत्ताराम नायक सहित अनेक सहायक आचार्य व शिक्षार्थी, शोधार्थियों ने भाग लिया।अंत मे मीडिया प्रभारी डॉ अरविंद कुमार जोशी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
Published on:
25 Apr 2021 06:38 pm
