
32 साल से हो रहा है जेएनवीयू की जमीन पर कब्जा
जोधपुर. जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय की जमीन पर पिछले 32 साल से राज्य सरकार की निगाहें हैं। राज्य सेवा के अधिकारियों की कॉलोनी से शुरू हुआ जमीन पर कब्जा अब तक बरकरार है। हाल ही में नगर निगम की ओर से विवि के नया परिसर के अंदर से झालामंड तक नाला निकाला गया। विवि ने इसके लिए 210 करोड रुपए मांगे। निगम ने एक धेला भी नहीं दिया। रेजिडेंसी रोड पर राज्य सरकार का इनफार्मेशन सेंटर भी मुफ्त में जमीन लेकर बना लिया गया। अब राज्य सरकार 39 बीघा जमीन पर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर बनाने की सोच रही है, लेकिन विवि ने इस बार 470 करोड़ रुपए पहले से ही मांग लिए हैं।
वर्ष 1988 में राज्य सरकार को सरकारी अधिकारियों के आवास के लिए भूमि चाहिए थी। विवि कर्मचारियों व शिक्षकों के भारी विरोध के बाद 5 एकड़ जमीन के बदले झालामण्ड चौराहे के पास जेएनवीयू को 15 एकड़ जमीन दी गई, लेकिन इसका विवि को फायदा नहीं हुआ। यह जमीन मुख्य कैंपस से कटी हुई है इसलिए आज भी यह वीरान है। सरकारी अधिकारियों के आवास मरुभूमि के तौर पर आज भी विवि की जमीन पर है।
जेएनवीयू की सिण्डीकेट या सरकार की सिण्डीकेट
जेएनवीयू सिण्डीकेट में कुलपति के अलावा उसके द्वारा नामित दो डीन व दो प्रोफेसर, सरकार द्वारा नामित दो विधायक, सरकार के दो प्रतिनिधि, कॉलेज शिक्षा निदेशक, राज्यपाल का प्रतिनिधि और एक छात्र प्रतिनिधि होता है। कुल 12 सदस्य है। राज्य सरकार के सीधे 5 प्रतिनिधि होते हैं। कुलपति की नियुक्ति भी राज्य सरकार ही करती है। ऐसे में कुलपति व उसके द्वारा नामित डीन-प्रोफेसर भी सरकार के विरुद्ध नहीं जा सकते। इस तरह सिण्डीकेट के निर्णय को सीधे तौर पर सरकार प्रभावित करती है। विवि की जमीन का मुद्दा भी सिण्डीकेट में रखा हुआ है।
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‘जेडीए को जमीन दी नहीं है। इसके लिए 4 सदस्यीय कमेटी कठित की है। अब किसी को मुफ्त जमीन नहीं दी जाएगी। नगर निगम को भी भुगतान के लिए लिखा है।’
-प्रो पीसी त्रिवेदी, कुलपति, जेएनवीयू जोधपुर
Published on:
08 Feb 2021 05:20 pm
