
कॉलोनी की सुरक्षा दीवार के सहारे बरसों से शहर के गंदे नालों व अवैध टैक्सटाइल फैक्ट्रियों का जमा प्रदूषित पानी
जोधपुर. तस्वीरों में आप जो यह दृश्य देख रहे हैं यह किसी झील या तालाब का नहीं बल्कि जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र में बसी डर्बी कॉलोनी का है। जहां रहने वाले लोगों की पीड़ा शासन एवं प्रशासन के कानों तक नहीं पहुंचती। इसी का नतीजा है कि कॉलोनी की सुरक्षा दीवार के सहारे बरसों से शहर के गंदे नालों व अवैध टैक्सटाइल फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी जमा हो रहा है। अब तक 10 फीट की अधिक गहराई में जमा यह पानी लोगों के लिए बारिश के समय में बैरन बन जाता है। बारिश में यहां रहकर रात गुजारना लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि पानी का स्तर बढऩे पर कॉलोनी में बने कमरों के सहारे पानी कॉलोनी में प्रवेश कर जाता है। फिर शुरु होता है बर्बादी का खेल।
श्रमिक बोले तकलीफ सहना मजबूरी
कॉलोनी में रहने वाले श्रमिकों यहां खतरे के साए के बीच रहने को मजबूर है। श्रमिकों का कहना है कि खतरे का अंदेशा तो है, लेकिन प्रशासन को भी तो हमारी कोई परवाह नहीं। इसलिए तकलीफ सहना मजबूरी हो गया है। एक श्रमिक विद्या शंकर ने बताया कि ‘प्रशासन ने तो हमें लावारिस हाल पर छोड़ दिया है, जब कभी हादसा होगा तो राजनेता हो या प्रशासनिक अधिकारी सभी अपनी रोटियां सेकने आ जाएंगे’।
महिलाएं बोली: रातभर बच्चों की रखवाली में कटी रात
पत्रिका टीम भी डर्बी कॉलोनी पहुंची तो बारिश की आशंकाओं से घिरी कॉलोनी की महिलाओं ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि रात भर बारिश के चलते सो नहीं पाए। पानी के बहाव में छोटे बच्चे बह नहीं जाए इसलिए सारी रात खड़े रहकर बच्चों की रखवाली करते रहें। बारिश बंद होने व पानी का स्तर कम होने के बाद भोर हुई तो भूख प्यास से तड़पते बच्चों के लिए जैसे तैसे करके खाना बनाया। इसके बावजूद बारिश में कई श्रमिकों का सामान पानी में बह गया। रात में क्षतिग्रस्त हुए कमरों में कोई हादसा न हो इस डर से यहां रहने वाले सैकड़ों लोगों ने कॉलोनी में ही बनी स्कूल में शरण ली, लेकिन यहां भी रात में पानी भर गया।
इसलिए पैदा हो रहे हालात-
शहर के गंदे नालों एवं अवैध रुप से चलने वाली औद्योगिक इकाइयों का पानी निकासी के अभाव में डर्बी कॉलोनी की सुरक्षा दीवार के सहारे इक्_ा हो रहा है। यह हाल पिछले 6 वर्षों से हैं। रात के समय अवैध कपड़ा फैक्ट्रियों का पानी यहां मिलने से इसका स्तर और भी ज्यादा बढऩे लगता है। कॉलोनी में वर्तमान में 600 से अधिक कमरों में 1500 से अधिक लोग रहते हैं। कॉलोनी में रहने वाले लोगों के पास विद्युत, पेयजल की कोई सुविधा नहीं है, लेकिन विधायक, कलक्टर से लेकर निगम व जेडीए के तमाम अधिकारियों ने लोगों को यहां आकर समाधान का भरोसा दिलाया, लेकिन अभी तक हालात जस के तस ही हैं।
Published on:
18 Aug 2019 07:45 pm
