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जोधपुर जिले की 6 पंचायत समितियों में अकाल के हालात, गिरदावरी रिपोर्ट को लेकर किसानों में उबल रहा है रोष

किसानों ने तो गिरदावरी से पहले ही अकाल घोषित कर दिया था, लेकिन प्रशासन की ओर से कराई गई गिरदावरी ने जमीनी हकीकत पर स्याही फेर दी।
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यमुनाशंकर सोनी/जोधपुर. जिले के हजारों किसानों की कराह दीपावली के धूम-धड़ाके और विधानसभा चुनाव के शोर में दब सी गई है। किसान और गांवों के जनप्रतिनिधि करीब दो माह से ‘अकाल-अकाल’ करते यहां से वहां घूमते फिर रहे हैं, पर कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। पूरे जोधपुर जिले में इस साल औसत से काफी कम वर्षा हुई। जिले में वर्षा का औसत 360 मिमी के मुकाबले करीब 250 मिमी वर्षा ही दर्ज की गई। लेकिन जिले की 13 तहसीलों की 16 पंचायत समितियों में से मण्डोर, लूणी, भोपालगढ़, बालेसर, बाप और शेरगढ़ में जून से सितंबर के बीच कहीं एक तो कहीं दो इंच बारिश हुई। लिहाजा पानी का संकट वैसे तो पूरे जिले में ही है, लेकिन इन छह पंचायत समितियों में हालात इसलिए ज्यादा खराब हुए कि बुवाई के बाद एक बार भी ढंग की बरसात नहीं हुई।

इस कारण बाजरा, मूंग, तिल और ग्वार की फसलें चौपट हो गई। ‘रामजी मेह बिना कोनी मारे’ की कहावत झूठी साबित हो गई और ‘एक मेह-एक मेह करता बढ़ेरा गया परा’ कहावत सौ फीसदी खरी होती नजर आ रही है। यही वजह है कि बड़े अरमानों से बोई हुई फसल देखने सुबह-शाम खेतों के चक्कर काटने वाले किसान अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहे हैं और मवेशी हरा छोड़, सूखे तिनकों की तलाश में खेत दर खेत भटकते नजर आ रहे हैं। किसानों ने तो गिरदावरी से पहले ही अकाल घोषित कर दिया था, लेकिन प्रशासन की ओर से कराई गई गिरदावरी ने जमीनी हकीकत पर स्याही फेर दी।

अब इन पंचायत समितियों के किसानों में गिरदावरी रिपोर्ट को लेकर गुस्सा उफान पर है। विभिन्न पंचायत समितियों के किसानों और पंचायत जनप्रतिनिधियों की ओर से जिला प्रशासन को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। जोधपुर तहसील के सरपंच संघ के अध्यक्ष पप्पूराम विश्नोई की अगुवाई में तीन दिन पहले जिला प्रशासन को दिए ज्ञापन में राजस्व विभाग की ओर से कराई गई गिरदावरी को झूठ का पुलिंदा बताया गया। ज्ञापन में साफ कहा है कि प्रशासन कृषि विभाग से रिपोर्ट मंगाकर स्थिति का आकलन करे और पता लगाए कि कहां घालमेल हुआ है। किसानों के अनुसार राजस्व विभाग की गिरदावरी में तहसील के सिर्फ नौ गांवों में खराबा 30 प्रतिशत से अधिक बताया गया है, जबकि तहसील के अधिकांश गांवों में 80 प्रतिशत से अधिक खराबा हुआ है। यही बात लूणी पंचायत समिति के किसानों की ओर से तहसीलदार को दिए ज्ञापन में कही गई है। गिरदावरी में धूंधाड़ा ग्राम पंचायत के गांवों में केवल 25 प्रतिशत खराबा बताया गया है, जबकि किसानों ने वास्तविक खराबा 80 प्रतिशत तक बताते हुए पुन: गिरदावरी की मांग की है। लूणी तहसीलदार का कहना है कि किसानों की मांग पर विचार किया जा रहा है।

किसानों ने कहा : सितंबर में ही चेता दिया था


ऐसा नहीं है कि गिरदावरी दुबारा कराने की मांग अचानक आ गई। भारतीय किसान संघ के तुलसाराम सिवर के अनुसार जिले की कई पंचायत समितियों में चारे-पानी का संकट गहराता जा रहा है और प्रशासन की ओर से अभी तक कहीं भी कोई प्रबंध नहीं किया जा रहा। सिवर के अनुसार किसान संघ की ओर से 15 सितंबर को ही प्रशासन को ज्ञापन देकर अकाल की स्थिति का आकलन कराने का आग्रह किया गया था। तब प्रशासन ने कहा था कि अक्टूबर में राजस्व विभाग की गिरदावरी होने वाली है। तब स्थिति सामने आ जाएगी। लेकिन गिरदावरी रिपोर्ट ने पहले ही सूखे की मार से झुलस रहे किसानों को और भडक़ा दिया।

आरोप : बंद कमरों में बना दी गिरदावरी रिपोर्ट

जोधपुर तहसील सरपंच संघ के अध्यक्ष विश्नोई का आरोप है कि जिले के अधिकांश पटवारी गिरदावरी करने फील्ड में नहीं गए। गिरदावरी रिपोर्ट बंद कमरों में बैठ कर तैयार की गई। विश्नोई ने कहा कि गिरदावरी शुरू होने से पहले ही पटवारियों ने बैठकें कर तय कर लिया था और संभवत: प्रशासन का भी दबाव था कि खराबा 30 प्रतिशत तक ही बताना है। वजह यह कि 33 प्रतिशत से अधिक खराबा होने पर अकाल घोषित किया जाता है और केंद्र सरकार की ओर से किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए कई सारी औपचारिकताएं पूरी करनी होती है।

चिंता : चारे का भाव बढ़ा, मवेशियों के लिए पानी का संकट


किसान नेताओं और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के अनुसार वर्षा कम होने से सबसे ज्यादा मार दुधारू मवेशियों पर पड़ी है। गांवों में मवेशियों के लिए बनी पानी की खेûियां भराने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रबंध करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा चारे के दाम दो गुना तक बढ़ गए हैं। चीपटा की कुतर पहले करीब 150 रुपए डाली (बीस किलो) थी, वहीं अब करीब सवा दो सौ रुपए डाली मिल रही है। बाजरा कुतर का भाव 110 रुपए डाली से 180-190 रुपए और खाखला 40 रुपए से बढकऱ 70-80 रुपए डाली हो गया है।

शिकायत है तो आकलन करेंगे

‘यह सही है कि जिले में औसत से कम वर्षा हुई है। लेकिन राजस्व प्रशासन की ओर से की गई गिरदावरी वास्तविक स्थिति के आधार पर की गई है। अगर किसी को शिकायत है तो उसका आकलन किया जाएगा।


- डॉ. रविकुमार सुरपुर, जिला कलक्टर, जोधपुर

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