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जोधपुर स्थापना दिवस : ये 10 बदलाव अगर हम जीवन में स्थापित कर लें तो बदल जाएगा सूर्यनगरी का भविष्य

हमारा शहर 562वां स्थापना दिवस मना रहा है। हर बार की तरह इस बार बाजार-सड़कों पर रौनक नहीं होगी। लेकिन लोगों के दिलों में उल्लाह कायम रहेगा। घरों में रहकर ही इस दिन को खास बनाने की अपील की गई है। पिछले 50 दिन से शहर घरों में है। कहीं लॉकडाउन तो कहीं कफ्र्यू की सख्ती भी झेल रहा है। इस अवधि में हमारी जीवन शैली काफी बदली है।
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जोधपुर स्थापना दिवस : ये 10 बदलाव अगर हम जीवन में स्थापित कर लें तो बदल जाएगा सूर्यनगरी का भविष्य

अविनाश केवलिया/जोधपुर. हमारा शहर 562वां स्थापना दिवस मना रहा है। हर बार की तरह इस बार बाजार-सड़कों पर रौनक नहीं होगी। लेकिन लोगों के दिलों में उल्लाह कायम रहेगा। घरों में रहकर ही इस दिन को खास बनाने की अपील की गई है। पिछले 50 दिन से शहर घरों में है। कहीं लॉकडाउन तो कहीं कफ्र्यू की सख्ती भी झेल रहा है। इस अवधि में हमारी जीवन शैली काफी बदली है।

खान-पान से लेकर व्यवहार और रीति-रिवाज से लेकर आबो-हवा तक बदली है। यह बदलाव जो अभी लॉकडाउन की मजबूरी के कारण आया है क्यों न इसे स्थाई किया जाए। जोधपुरवासी आज स्थापना दिवस पर शपथ लें कि यदि हालात सामान्य होने पर भी हो अच्छे बदलाव हमने अपनाए हैं, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। ये वो 10 बदलाव है जिन्हें आगे भी हम जारी रखते हैं तो हालात कुछ और अच्छे होंगे...।

1. अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने लगे - चाहे कोविड-19 का असर लेकिन सभी संक्रमण से दूर रहने और स्वस्थ रहने के लिए योग व अन्य व्यायाम करने लगे। नागौरी गेट के राम मोहल्ला में तो सामूहिक योगाभ्यास भी हो रहा। स्वास्थ्य के प्रति इसी सजगता और सोशल डिस्टेंसिंग को आगे भी जारी रखें और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं तो कई बीमारियों से लड़ सकते हैं।

2. कचरा व गंदगी कम : शायद आपको महसूस नहीं हुआ होगा लेकिन यह सत्य है कि लॉकडाउन की इस अवधि में कचरा व गंदगी भी हमने कम फैलाई। औसतन जितना कचरा शहर से एकत्रित होता था उससे 150-200 टन कचरा कम जनरेट हुआ। हमने सीखा कचरा बाहर नुक्कड़ पर नहीं डालना। इसे आदत को आगे लेकर चलें तो सूरत बदल सकते हैं।

3. प्रदूषण कम हुआ - चाहे वाहनों का प्रदूषण हो या औद्योगिक सभी इस अवधि में कम हुआ। धुंधला आकाश साफ नजर आने लगा और जोजरी नदी भी साफ हुई। इस साफ प्रकृति को ही हम आगे ले जाएं तो बेहतर होगा। यही हमें कई बीमारियों से लडऩे में मदद कर सकती है।

4. रीति-रिवाज के खर्च बच गए - चाहे शादी-ब्याह की चकाचौंध में लाखों का खर्च हो या मृत्युभोज का भार इस लॉकडाउन में सभी सीमित हो गए। सादगी से शादी का भी चलन सा हो गया। दिखावटी शादियां अब आगे न जाने कितने दिनों तक होगी ही नहीं। मृत्यु भोज भी नहीं हुए। इसी सादगी को आगे लेकर चलते हैं तो कई मध्यमवर्गीय परिवार जो इस खर्चों से टूट जाते हैं वह बच जाएंगे।

5. परिवार को समय देने लगे - परिवार के पाक कला में निपुण होना या किसी प्रकार का खेल खेलना। इस डेढ़ माह की अवधि में सभी ने परिवार को समय दिया। साथ रामायण देखना और घर से दूर काम करने वालों का भी लौट कर आना। यह संदेश है कि परिवार को समय देना जरूरी है। इसी बात को हम आगे भी जारी रख सकते हैं।

6. जंक फूड नहीं हेल्दी फूड - लॉकडाउन अवधि में बाहर का जंक फूड आपको नहीं मिला। इसकी बजाय आपने फ्रूट और घरेलू सब्जियों का उपयोग किया है। जंक फूड बीमारी का घर है यह समझ आ गया है। हालात सामान्य होने पर भी हेल्दी फूड को भी तवज्जों देंगे तो भविष्य अच्छा होगा।

7. मदद करना सीखा - किसी जरूरतमंद की मदद करना भी इस अवधि में सीखा। पड़ोसी की मदद भी की होगी। परिवार के सदस्यों को भी कोई सामान लाकर दिया होगा। अब तक जो अकेला जीवन जी रहे हैं वह लोग सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए मन से नजदीक आ गए। मदद का यह भाव आगे भी जारी रख सकते हैं।

8. गांवों का महत्व - शहर में रहने वाले ऐसे लोग जिनके गांवों में घर है वह पलायन कर गए। देश के अलग-अलग हिस्सों में नौकरी-मजदूरी कर रहे लोग भी अपने गांव-खेत के प्रति आकर्षित हुए। लॉकडाउन ने गांव की अहमियत बताई। अब इस अहमियत हो भूलना नहीं है।

9. अपने काम खुद किए - लॉकडाउन की इस अवधि में कई लोग जो पहले हर काम के लिए दूसरों पर आश्रित थे उन्होंने खुद अपने काम किए। जैसे काम वाली बाई नहीं आई तो सफाई की, सब्जी-किराणा का सामान भी खुद लेकर आने लगे। यही अच्छी आदत भले मजबूरी में लगी, लेकिन इसे आगे भी जारी रखने की शपथ ले सकते हैं।

10. अपराध-हादसे नगण्य - एक-दो घटनाएं छोड़ दो तो अपराध का ग्राफ नीचे आ गया। सड़कों पर वाहन नहीं इसलिए हादसे हुए ही नहीं। शहर की सड़कों व हाइवे पर जो जिंदगियां हादसे छीन लेते थे वह बच गई। आगे भी संयम रख कर इसी प्रकार हम जिंदगियां बचा सकते हैं।

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