
चुनाव से पहले जेडीए व निगम को याद आई जोधपुर के विकास की, शहर को संवारने की कवायद में उधेड़ दिया शहर को
- कई सड़कों और चौराहों को खोदकर करवा रहे मरम्मत
जोधपुर. शहर के दोनों नगरीय निकाय जोधपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम चार साल में अचानक जाग गए हैं। चुनावी साल के चलते आनन-फानन में विकास करवाने के फेर में इन दिनों शहर को उधेड़ कर रख दिया गया है। अब दावा है कि चुनावी साल में 60 करोड़ खर्च कर शहर में विकास के कार्य करवाए जाएंगे। दोनों निकाय बजट और बजरी की कमी के बावजूद काम शुरू करवाते जा रहे हैं। कई काम तो लम्बे समय से अटके हुए हैं। इधर, खुदी हुई सड़कों के कारण लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
उधारी में चल रही जेडीए के 45 करोड़ के टेंडरजोधपुर विकास प्राधिकरण ने अपने पास बजट नहीं होते हुए भी कई टेंडर लगा दिए है। करीब 45-50 करोड़ की राशि तो सड़कों को चमकाने और डिवाइडर बनाने जैसे कार्यों पर ही खर्च होगी। इस वित्तीय वर्ष में अब तक सड़क मरम्मत व अन्य विकास कार्यों के अब तक 25 से अधिक लाइव टेंडर अलग-अलग जोन में लगाए गए हैं। हालात ये हैं कि सप्ताह में करीब दो शिलान्यास और उद्घाटन किए जा रहे हैं। जहां मांग, वहां घोषणाजेडीए की ओर से अभी औसतन सप्ताह में दो शिलान्यास एवं उद्घाटन करवाए जा रहे हैं। जो काम चुनाव से पहले पूरे नहीं हो सकते, उनका शिलान्यास कर श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। कई ऐसे कार्य भी हैं, जो शुरू होने के बाद डेढ़ से तीन साल की अवधि में पूरे होंगे, फिर भी उनके टेंडर जारी किए जा रहे हैं।बजरी पर रोक फिर भी धड़ाधड़ निर्माण टेंडर सुप्रीम कोर्ट की बजरी पर रोक है। फिर भी धड़ाधड़ विकास कार्यों के टेंडर जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में सरकारी उपक्रम खुद ही अवैध बजरी खनन को बढ़ावा दे रहा है। जेडीए के अधिकारी कहते हैं कि अभी टेंडर और वर्क ऑर्डर की प्रक्रिया पूरी होगी, तब तक बजरी पर रोक हट जाएगी, उसके बाद काम शुरू करेंगे।
Published on:
09 Jun 2018 06:28 pm
