
गजेंद्रसिंह दहिया जोधपुर .
तापमान जैसे-जैसे 45 डिग्री सेल्सियस के पास पहुंच रहा है, हमारी किडनी के पसीने निकल रहे हैं। अधिक गर्मी व पानी की कमी की वजह से किडनी सूख रही है। किडनी रुखी होने से पथरी बन रही है। एेसे में मरीजों को भागकर अस्पताल जाना पड़ रहा है। पथरी के साथ मूत्र में जलन और संक्रमण की शिकायतें बढ़ गई हैं। बुजुर्गों में प्रोस्टेट ग्रंथि परेशान करने लगी है। डॉक्टरों ने किडनी को गीला रखने यानी दिन में 4 से 5 लीटर पानी पीने की सलाह दी है, ताकि किडनी को आराम मिल सके।
मथुरादास माथुर अस्पताल के मूत्र रोग विभाग में ओपीडी का समय चार दिन से बढ़ाकर सात दिन करने के बावजूद हर रोज सौ के लगभग मरीज पहुंच रहे हैं। एक पखवाड़े से मरीजों की संख्या में 25 से 30 फीसदी इजाफा हुआ है। दो महीने पहले तक आउटडोर में 40 फीसदी मरीज पथरी के आते थे, जिनकी संख्या अब सत्तर फीसदी हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी और बढ़ी तो रोगियों की संख्या बढ़ सकती है।
पसीने के साथ बाहर आ रहा पानी
तापमान अधिक होने से मूत्र में अम्लता बढ़ जाती है। शरीर तेजी से पसीना निकालकर तापक्रम ३७ डिग्री बनाए रखता है। पसीने में लवणों के साथ काफी पानी निकलता है। शरीर में साठ फीसदी पानी है। जब कोशिका में ३० फीसदी तक पानी कम हो जाता है तो डिहाइड्रेशन हो जाता है। पानी की कमी पूरी करने के लिए हमारा शरीर मूत्र की सांद्रता बढ़ाता है यानी मूत्र में पानी कम होकर वह अधिक अम्लीय प्रकृति का हो जाता है। मूत्र गाढ़ा होने के साथ शरीर में लवण का अवक्षेपण होने से ऑक्सजलेट, फॉस्फेट, यूरेट, यूरिक एसिड और अमीनो एसिड के कण किडनी में एकत्र होकर पथरी बन जाते हैं।
पथरी से मूत्रमार्ग में संक्रमण
किडनी में सामान्यत कैल्सिशयम ऑक्जलेट की पथरी जमती है। पथरी के चलते मूत्र मार्ग में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मूत्र में जलन होने लगती है। यह खतरा महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा दुगुना होता है, क्योंकि उनका यूरिनरी ट्रेक छोटा होता है।
पानी अधिक पिओ
गर्मियों में पानी की कमी की वजह से किडनी और मूत्र संबंधित मरीज बढ़ गए हैं। लोग भरपूर पानी पिएं तो उन्हें अस्पताल नहीं आना पड़ेगा। अधिक पानी से किडनी स्वस्थ रहेगी।
डॉ. प्रदीप शर्मा, मूत्र रोग विशेषज्ञ, मथुरादास माथुर अस्पताल