
बड़ा खुलासा...एसपी ने दबा लिए साढ़े पांच लाख...ऐसे खुली पोल
विकास चौधरी/जोधपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर जोधपुर और जिले में तैनात थानाधिकारी अपराधिक मामलों की तत्काल एफआइआर दर्ज करने की जगह टालमटोल करते हैं। इस कारण पीडि़त आमजन को पुलिस कमिश्नर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह बात किसी नेता ने नहीं, बल्कि पुलिस महानिरीक्षक और पांच माह से जोधपुर पुलिस कमिश्नर का जिम्मा संभाल रहे आलोक वशिष्ठ ने कही है। जोधपुर पुलिस कमिश्नर रहते वशिष्ठ ने पांच माह में करीब 80 एफआइआर विभिन्न थानों में दर्ज करवाई। विधानसभा चुनाव के बाद पुलिस महानिरीक्षक (सतर्कता) पद पर स्थानांतरित वशिष्ठ बुधवार को रिलीव होंगे। नव नियुक्त कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ संभवत: अगले सप्ताह कार्यभार ग्रहण करेंगे।
यह स्थिति तो तब है जब उच्चतम न्यायालय, पुलिस मुख्यालय और जिले के पुलिस अधिकारियों के स्पष्ट निर्देश हैं कि थाने में शिकायत लेकर पहुंचने वाले किसी भी फरियादी की एफआइआर तुरंत दर्ज की जाए। आइपीएस वशिष्ठ ने गत 3 अगस्त को पुलिस कमिश्नर कार्यभार संभाला था। इसके बाद उन्होंने जिले के सभी अधिकारियों और प्रत्येक थानाधिकारी को आमजन की हर शिकायत की एफआइआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। लेकिन इस आदेश की पालना नहीं हुई और अधिकांश थानों में तैनात अधिकारी अपने हिसाब से काम करते रहे। यही वजह है कि पांच माह के कार्यकाल के दौरान प्रतिदिन फरियादी पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचने को मजबूर होते रहे।
हर माह 14-15 मामले परिवाद पर दर्ज
पुलिस महानिरीक्षक आलोक वशिष्ठ ने भरतपुर रेंज आईजी पद से गत वर्ष 3 अगस्त को जोधपुर पुलिस कमिश्नर का कार्यभार संभाला था। तब से अब तक उनके कार्यालय में पेश होने वाले अधिकांश फरियादी थानों में एफआइआर दर्ज न होने से परेशान थे। यही वजह है कि हर महीने 14 से 16 एफआइआर कमिश्नर के निर्देश पर दर्ज की गई। जबकि वशिष्ठ ने पद संभालते ही निर्देश दिए थे कि प्रत्येक थाने में आमजन की शिकायत पर तुरंत एफआइआर दर्ज की जाए। जांच में आरोप गलत पाए जाने पर एफआर लगा दी जाए।
वर्ष भर में दर्ज मामले एक नजर में
वर्ष / कुल मामले दर्ज / झूठ में एफआर/ चालान
2016/ 5337/ 1324/ 2415
2017/ 5255/ 1333/ 2301
2018/ 5676/ 1464/ 2365
(पुलिस कमिश्नर कार्यालय से प्राप्त)
Published on:
09 Jan 2019 11:21 am
