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ये करगिल हीरो बने मिग 27 की विदाई के साक्षी, युद्ध में दुश्मनों के दांत कर दिए थे खट्टे

भारतीय वायुसेना के ग्राउंड अटैक फाइटर मिग-27 (अपग्रेडेड) की शुक्रवार को यहां वायुसेना स्टेशन पर होने वाली विदाई के साक्षी करगिल युद्ध के हीरो भी बने। इनमें ग्रुप कैप्टन अश्विनी कुमार मंडोखोट व फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता राव भी शामिल हैं।
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kargil war heros attended retirement ceremony of mig 27 in jodhpur

ये करगिल हीरो बने मिग 27 की विदाई के साक्षी, युद्ध में दुश्मनों के दांत कर दिए थे खट्टे

जोधपुर. भारतीय वायुसेना के ग्राउंड अटैक फाइटर मिग-27 (अपग्रेडेड) की शुक्रवार को यहां वायुसेना स्टेशन पर होने वाली विदाई के साक्षी करगिल युद्ध के हीरो भी बने। इनमें ग्रुप कैप्टन अश्विनी कुमार मंडोखोट व फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता राव भी शामिल हैं, जिन्होंने मिग-27 के मारक प्रहारों से करगिल की पहाडिय़ों से दुश्मन को मार भगाया था। इनमें से अधिकांश अधिकारी गुरुवार को जोधपुर पहुंच गए।

आठ दिन तक युद्ध बंदी रहे थे नचिकेता
फ्लाइंग लेफ्टिनेंट नचिकेता करगिल युद्ध के दौरान 8 दिनों तक पाकिस्तान में युद्धबंदी भी रहे थे। मिग-27 से दुश्मन के एक मुख्य सप्लाई डिपो पर सफलतापूर्वक रॉकेट व बम से हमला करने के दौरान उनके विमान के इंजन ने आग पकड़ ली। उन्होंने इंजन रिस्टार्ट करने की खूब कोशिश की, लेकिन संभवत: उनके विमान पर दागी गई मिसाइल के असर से इंजन ने काम करना बंद कर दिया था। नचिकेता खुद विमान से सुरक्षित कूद गए, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने उन्हें बंधक बना लिया। पाकिस्तान ने नचिकेता को बाद में भारतीय अधिकारियों के सुपुर्द किया और वे 4 जून 1999 को वाघा बॉर्डर के रास्ते वापस लौटे।

नचिकेता इन दिनों हालांकि एक निजी विमानन कम्पनी में पायलट है, लेकिन उनका जज्बा आज भी वैसा ही है, जैसा उन्होंने करगिल युद्ध के दौरान दिखाया था।एक हमसफर की विदाईबेंगलूरु के मूल निवासी ग्रुप कैप्टन मंडोखोट भी मिग-27 की विदाई के साक्षी बनने जोधपुर आए हैं। वे कहते हैं ये मिग-27 की नहीं एक बेहतरीन हमसफर की विदाई है। इसकी याद हमेशा न सिर्फ उनके बल्कि हर एक वायुसैनिक के दिल में सदा के लिए बनी रहेगी। वायुसेना में मिग-21 के पायलट के रूप में कॅरियर शुरू करने वाले ग्रुुप कैप्टन मंडोखोट को 1992 से मिग-27 उड़ाने का मौका मिला।

उन्होंने आज सुखोई-30 विमान उड़ा रही एयरफोर्स की स्क्वाड्रन-दो के पायलट के रूप में मिग-27 से करगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे। वे कहते हैं कि मिग-27 एक बेहतरीन लड़ाकू विमान है, जिसने मौका मिलने पर पहाड़ी, रेगिस्तानी, समुद्री और तटवर्तीय इलाकों में अपनी क्षमता साबित कर दिखाई है। इसकी लोड कैरिंग कैपेसिटी ने इसे एक अनूठा लड़ाकू विमान साबित किया। अपग्रेडेड मिग-27 का करगिल में दिखाया गया दमखम आज दुनिया की प्रमुख वायुसेनाएं भी मानती हैं। श्रीलंका की वायु सेना ने तो बाकायदा मिग-27 पर हमारी वायुसेना ट्रेनिंग भी ली है।

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