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झाडिय़ों से घिरा खीचन का डेढ़ सौ साल पुराना खत्रीनाडा

खीचन (जोधपुर). क्षेत्र में पशुधन की प्यास बुझाने वाला खत्रीनाडा बदहाल है। वर्षों से इसकी सार संभाल नहीं से अब यह अपनी पहचान खोने लगा है।  
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झाडिय़ों से घिरा खीचन का डेढ़ सौ साल पुराना खत्रीनाडा

झाडिय़ों से घिरा खीचन का डेढ़ सौ साल पुराना खत्रीनाडा

खीचन (जोधपुर). क्षेत्र में पशुधन की प्यास बुझाने वाला खत्रीनाडा बदहाल है। वर्षों से इसकी सार संभाल नहीं से अब यह अपनी पहचान खोने लगा है।

जानकारी के अनुसार करीब 150 साल पूर्व बनाया यह जलस्रोत गांव का परम्परागत जलस्रोत है। खसरा संख्या 155 में 9 बीघा से अधिक क्षेत्र में फैले इस नाडे पर अब अतिक्रमियों की भी नजर है। वर्षों से प्रशासन द्वारा इसकी सुध नहीं लेने से नाडी में बबूल की झाडिय़ां ने घेर लिया है। अब इसमें कंकड़ पत्थर एवं कचरा जमा है। पूर्व में इस नाडी में खत्रियों द्वारा रंगाई-छपाई का कार्य भी किया जाता था। यह वजह है कि इसे खत्रीनाडा भी कहा जाता है।

कहने के लिए वर्ष 2018 में तत्कालीन उपखण्ड अधिकारी के निर्देशानुसार नाडी की पैमाइस भी की गई थी। इसके बाद श्रमदान भी किया गया। तब लगा कि अब इस नाडे के दिन फिरेंगे। लेकिन इसके बाद हुआ कुछ नहीं। इसका सौन्दर्यीकरण करवाना तो दूर इसकी सुध तक नहीं ली। आखिर हाल ही खीचन में ई-चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंप कर नरेगा के तहत इसके सौन्दर्यीकरण की मांग की।

इनका कहना है
ई-चौपाल में इस खत्री नाडे के सौंदर्यीकरण के लिए एप्लीकेशन प्राप्त हुई है। ग्राम पंचायत द्वारा इस पर कभी कार्य नहीं हुआ है तो जल्द ही इस खत्री नाडी का सौंदर्यकरण करवाने का प्रयास रहेगा।
-यशपाल आहूजा, उपखंड अधिकारी, फलोदी

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