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कुरजां के लिए आसान नहीं होगी आगे की जिंदगी, झुलसा देगी ये गर्मी

ठण्डे मौसम में विचरण करने वाले मेहमान पक्षी कुरजां थार की झुलसा देने वाली भीषण गर्मी में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में अपना जीवन व्यतीत करने को मजबूर है।
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Kurja in Khichan

कुरजां के लिए आसान नहीं होगी आगे की जिंदगी, झुलसा देगी ये गर्मी

फलोदी (जोधपुर) मंगोलिया, कजाकिस्तान, चीन आदि देशों के ठण्डे मौसम में विचरण करने वाले मेहमान पक्षी कुरजां यहां बर्फबारी के कारण पैदा हुई भोजन की विपरीत परिस्थितियों के चलते प्रतिवर्ष राजस्थान के कई हिस्सों में शीतकालीन प्रवास पर आती है, लेकिन खीचन में शीतकालीन प्रवास पर हजारों कुरजां पक्षियों के समूहों की वतन वापसी के दौरान 6 पक्षी खीचन में ही रह गए।

अब ये पक्षी थार की झुलसा देने वाली भीषण गर्मी में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में अपना जीवन व्यतीत करने को मजबूर है। गौरतलब है कि कुरजां 30 डिग्री तक का तापमान सहने करने के लिए अनुकूलित है, लेकिन आगामी दिनों में तो यहां का तापमान 48-49 डिग्री सेल्सियस तक पंहुच जाएगा।


5 कुरजां नियमित कर रही विचरण

शीतकालीन प्रवास पर आए मेहमान परिन्दों ने फरवरी माह में वतन वापसी की उड़ान शुरू कर दी थी, लेकिन पक्षियों के वतन वापसी करते समूहों में 6 कुरजां पीछे रह गई थी। कुछ दिन तक तो सभी 6 कुरजां नियमित देखी जा रही थी, लेकिन अब कुछ दिनों से खीचन के तालाबों पर सिर्फ 5 कुरजां ही देखी जा रही है।


ये कुरजां नहीं आती है दाना लेने

सामान्यता शीतकालीन प्रवास के दौरान कुरजां मलार व बाप के नमक उत्पादन क्षेत्र में रात्रि विश्राम करती है तथा सुबह होते ही खीचन में पक्षी चुग्गाघर आकर दाना लेती है, लेकिन पीछे छूटे ये पक्षी अब अपने समूहों के बिना दाना लेने पक्षी चुग्गाघर नहीं आ रहे है। ये पक्षी दिन भर गांव के विजयसागर, रातड़ी नाडी तालाबों के पानी व मैदानों में पेड़ों की छांव में बैठे नजर आते है तथा रात में कभी तालाब तो कभी खेतों में चली जाती है।


तो गहरा हो जाएगा इन पक्षियों का रंग

ठण्डे मौसम रहने वाले कुरजां पक्षियों की बात करें तो अपने समूहों से बिछुडकऱ पीछे रह गए इन पक्षियों के लिए यहां की गर्मी तो काफी पीड़ादायक है। इन पक्षियों के लगातार गर्मी में रहने से इनका रंग गहरा हो जाता है।


इन्होंने कहा

खीचन पीछे रही 5 कुरजां रोजना देखी जा रही है। गर्मी से इन पक्षियों का रंग गहरा होने लगा है। ये कुरजां चुग्गा लेने भी नहीं आ रही है। यदि ये पक्षी सितम्बर माह तक जीवित रहे तो अगले शीतकालीन प्रवास में यहां आने वाले कुरजां के समूहों के साथ मिल जाएंगे और वतन वापसी हो सकेगी।
सेवाराम माली, पक्षी प्रेमी, खीचन (फलोदी)

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