
फलोदी. खीचन में मृत मिली कुरजां
गुरुवार को एक साथ 37 कुरजां की मौत हो गई थी। अब गांव के पक्षी प्रेमी व पक्षी विशेषज्ञ इस हादसे की पुनरावृति न हो, एैसी व्यवस्थाओं की मांग कर रहे है। साथ ही इन पक्षियों की मौत का कारणों का खुलासा करने की मांग कर रहे है। गौरतलब है कि पिछले ६ साल में कुरजां में फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षणों से अब तक करीब 100 पक्षियों की मौत हो चुकी है।
कब-कब मरे पक्षी-
वर्ष 2013 में 39 पक्षी, 2017 में 25, 2018 में 2, 2019 में अब तक 38 कुरजां की मौत हो चुकी है। इन पक्षियों की मौत पाइजनिंग से होने की आशंका है, क्योंकि इन पक्षियों के मुंह से सफेद झाग निकलते देखे गए है। अगर इन मामलों में बीमार होने वाले पक्षियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2013 से अब तक करीब 70 कुरजां पॉइजनिंग से बीमार हो चुकी है। एैसे में पॉइजनिंग अब कुरजां की जान पर आफत बना हुआ है।
इधर वन्यजीव विभाग ने लिए सैंपल-
उप वन संरक्षक वन्यजीव जोधपुर महेश चौधरी ने बताया कि संभवतया यह मामला फूड पॉइजनिंग का है। फलोदी से भेजे कुरजां के शव से विसरा के सैंपल लिए गए है तथा सैंपल लैबारेट्री भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि जोधपुर से वन्यजीवों के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. श्रवण सिंह को फलोदी भेजा गया है तथा प्रशासन के साथ इस मामले पर चर्चा होगी। साथ ही चिकित्सक व अन्य अधिकारी फील्ड में जाकर मामले की पड़ताल करेंगे तथा लोगों को कुरजां के संरक्षण को लेकर जागरूक करेंगे।
क्या कहते है विशेषज्ञ-
पक्षी विशेषज्ञ व असिस्टेंट प्रोफेसर गुरु गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी दिल्ली डॉ. सुमित डूकिया का कहना है कि संभवतया पक्षियों की मौत गेहूं के उपचारित बीजों से हुई है, क्योंकि कई स्थानों पर उपचारित बीजों का उपयोग किया जाता है। इन उपचारित बीजों को २४ घण्टे के भीतर यदि पक्षी खा ले तो यह घटना हो सकती है। (कासं)
----------------
Published on:
09 Nov 2019 11:32 am
