
धुन्धाड़ा/जोधपुर. कस्बे में पिछले करीब दो माह से पशु चिकित्सक नहीं होने से कस्बे का पशु चिकित्सालय बंद पड़ा है। काफी समय से एक ही पशु चिकित्सक कार्यरत था, जिनका स्थानान्तरण हो चुका है। आस पास के बीस-पच्चीस गांवो के मवेशियो का ईलाज भी इसी चिकित्सालय मे होता है लेकिन पिछले एक माह से यहां पर चिकित्सक नहीं होने के कारण इस भवन के ताले लगे हुए हैं ।
किसान एवं समाजसेवी शंकरराम माली ने बताया कि ग्रामीणो को मजबूरन निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। इससे निशुल्क दवाइयों का लाभ भी ग्रामीण पशुपालकों को नहीं मिल पा रहा है। धुन्धाड़ा व आसपास के गांवों में ज्यादातर ग्रामीण गाय, भैंस, बैल, भेड़, बकरियां, ऊंट आदि जानवर पालते हैं। बड़ी ग्रामीण आबादी पशुपालन पर ही निर्भर है। काफी समय से एक ही पशु चिकित्सक कार्यरत था, जिनका स्थानान्तरण हो चुका है। आस पास के बीस-पच्चीस गांवो के मवेशियो का ईलाज भी इसी चिकित्सालय मे होता है लेकिन पिछले एक माह से यहां पर चिकित्सक नहीं होने के कारण इस भवन के ताले लगे हुए हैं ।
Published on:
19 Feb 2021 02:35 pm
