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लोक अदालत ने दो लाख रुपए का मेडिक्लेम देने का दिया आदेश, इंशोरेश कम्पनी पर लगाया जुर्माना

इंशोरेश कम्पनी पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया  
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Lok Adalat verdict in Jodhpur

Lok Adalat verdict in Jodhpur

जोधपुर.स्थाई लोक अदालत ने एक फैसले में प्रतिपादित किया है कि जिस आधार पर बीमा कंपनी दावा खारिज करती है, बहस के समय अन्य कारण बताकर अपना बचाव नहीं कर सकती है। बीमा कंपनी पर दस हजार रुपए हर्जाना लगाते हुए अध्यक्ष ओमकुमार व्यास,सदस्य मगनलाल बिस्सा तथा केशरसिंह नरूका ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि प्रार्थी को दावा राशि 2 लाख 3 हजार 587 रुपए मय 9 फीसदी ब्याज व हर्जाना 30 दिन में अदा करें।

यह है मामला
रेलवे में सीटीआई पद पर कार्यरत देवराज रामदेव ने अधिवक्ता अनिल भण्डारी के माध्यम से परिवाद पेश कर बताया कि बीमा कंपनी से एक लाख 15 हजार रुपए की मेडिक्लेम पालिसी तथा पाँच लाख रुपए की टॉप अप मेडिक्लेम पालिसी करवाई हुई थी।फरवरी 2016 में उनके होंठ पर फुंसी व दर्द होने पर सोनोग्राफी करवाई, लेकिन वह सामान्य आई। अहमदाबाद में बॉयोप्सी करवाए जाने पर 23 फरवरी को प्रार्थी व चिकित्सक को पहली बार ही यह जानकारी हुई कि उन्हें कैंसर हो गया है।तब प्रार्थी का ऑपरेशन किया गया। बीमा कंपनी ने मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत एक लाख 15 हजार रुपए का दावा तो मंजूर कर दिया, लेकिन टॉप अप मेडिक्लेम पॉलिसी का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बीमा पॉलिसी के प्रथम वर्ष में ही कैंसर हो गया है जबकि वह दो साल से बीमार है और टॉप अप पॉलिसी में कैंसर का दावा 4 वर्ष बाद ही देय होता है। अदालत में अंतिम बहस करते हुए अधिवक्ता भण्डारी ने कहा कि 4 साल का अपवर्जन तब लागू होता है, जब यह बीमा कंपनी की ओर से साबित हो जाता कि प्रार्थी बीमा पॉलिसी प्रारंभ होने की तिथि 21 सितम्बर 2015 से पहले कैंसर से पीड़ित था। उन्होंने कहा कि कैंसर विशेषज्ञ को भी सर्वप्रथम 23 फरवरी 2016 को ही जानकारी हुई कि बीमाधारक को कैंसर हो गया है।उन्होंने कहा कि प्रार्थी ने प्रस्तावना प्रपत्र में कोई भी तथ्य नहीं छिपाया है सो उनका दावा विधिसम्मत होने से देय योग्य है। बीमा कंपनी की ओर से बहस के समय यह कहा गया कि टॉप अप पालिसी में 5 लाख रुपए तक का तो दावा ही देय नहीं है और इससे अधिक का दावा होने पर अगले 5 लाख रुपए का दावा देय होगा।अदालत ने परिवाद मंजूर करते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि प्रार्थी को 30 दिन में दावा राशि मय 9 फीसदी ब्याज व 10 हजार रुपए हर्जाना अदा करें।

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