लोंगेवाला के हीरो भेरौंसिंह राठौड़ को सैन्य सुविधाओं की दरकार

भैरोंसिंह राठौड़ का दावा है कि उन्होंने एलएमजी से दो दर्जन से अधिक पाक दुश्मनों को मार गिराया था। अदम्य साहस व शौर्य के लिए उन्हें 1972 में सेना मेडल से नवाजा गया था। पूर्व मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खान ने भी भैरोंसिंह राठौड़ को सम्मानित किया था।

By: pawan pareek

Updated: 16 Dec 2020, 12:08 AM IST

बेलवा (जोधपुर). 1971 के भारत पाक युद्ध के 50 साल पूर्ण होने पर बीएसएफ स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मना रही है। लेकिन 1971 के युद्ध में लोंगेवाला पोस्ट पर जीत के हीरो भैरोंसिंह राठौड़ करीब पांच दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें सरकार से न तो जमीन आवंटित की गई और ना ही पेंशन पूरी मिल रही है।

भैरोंसिंह राठौड़ का दावा है कि उन्होंने एलएमजी से दो दर्जन से अधिक पाक दुश्मनों को मार गिराया था। अदम्य साहस व शौर्य के लिए उन्हें 1972 में सेना मेडल से नवाजा गया था। पूर्व मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खान ने भी भैरोंसिंह राठौड़ को सम्मानित किया था। सन 1963 में बीएसएफ में भर्ती होकर राठौड़ 1987 में सेवानिवृत्त हुए थे। भैरोंसिंह का दर्द है कि उन्हें सरकार से जमीन नहीं मिली। पेंशन राशि भी कम है। छठे व सातवें वेतनमान का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पाया है। गांव में 25 बीघा जमीन है, वो भी बरसात पर निर्भर। परिवार का लालन पोषण पेंशन व खेती पर ही हो रहा है।

भैरोंसिंह बोले... मैं जिंदा हूं

साल 1997 में रिलीज हुई जेपी दत्ता की बॉर्डर फि़ल्म में अभिनेता सुनील शेट्टी (भैरोंसिंह राठौड़) ने पाकिस्तानी टैंक उड़ाने के लिए लेंड माइन उसके नीचे रख दी थी। फि़ल्म में उन्हें शहीद बताया गया था। सुनील शेट्टी ने फि़ल्म में भैरोसिंह सोलंकियातला का किरदार अदा किया था। पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि वे अभिनेता सुनील शेट्टी से मिलना चाहते है। उन्हें बताएंगे कि वे जिंदा है। उन्हें शहीद क्यों फिल्माया। भैरोंसिंह बताते है कि बॉर्डर फि़ल्म के डायरेक्टर व अभिनेता ने उनसे मुलाकात ही नहीं की। सेना के अधिकारियों ने जितनी स्क्रिप्ट लिखवाई उसी पर बॉर्डर मूवी फिल्माई गई।

pawan pareek Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned