
अभिषेक मनु सिंघवी
जोधपुर.
सांसद, अधिवक्ता और कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान जो कि निर्णय होगा वह सैद्धांतिक तौर पर अन्य प्रदेशों को भी प्रभावित करेगा। एक कार्यक्रम के सिलसिले में शनिवार को जोधपुर आए सिंघवी ने ‘पत्रिका’ से विशेष बातचीत में कहा कि सरकार को अब तक मास्टर प्लान के सिद्धांतों को लागू कर देना चाहिए था।
सिंघवी ने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय ने मास्टर प्लान मुद्दे को पुन: राजस्थान को लौटा दिया तो राज्य सरकार को इसके सिद्धांतों को लागू करना चाहिए था। लेकिन यह सरल काम भी सरकार नहीं कर पा रही है। एक तरह से यह उच्चतम न्यायालय की अवमानना है। इसके बाद से कई निर्देश जारी हो चुके हैं। लेकिन सरकार इस प्लान को लागू करने की बजाय गलियां ढूंढ रही है।
काले कानून विरोध साहसिक कदम
सिंघवी ने कहा कि पत्रकारिता के उन वर्गों को बधाई देता है हूं जो सरकार के विरुद्ध बोलने का साहत रखते हैं। इसमें पत्रिका अग्रणी है। उन्होंने काले कानून पर पत्रिका के रुख को साहस भरा कदम बताया। इस कानून को पढऩे के बाद कोई भी वकील इसे वाहियात कह देगा। इस कानून के पीछे सरकार की सोच परिलक्षित होती थी। अच्छा हुआ लागू होने से पहले उसे वापस ले लिया गया।
न्यायपालिका में भी हस्तक्षेप कर रही सरकार
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तम्भ है। एक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय में नहीं आने दिया जा रहा। इसका कारण सिर्फ यह है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में उस वक्त की सरकार के खिलाफ न्यायिक आदेश जारी किया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मुख्य न्यायाधीश की स्थाई नियुक्ति तक सरकार नहीं कर पा रही है। एेसे में एक बारगी तो सुप्रीम कोर्ट को अवमानना कार्रवाई करनी चाहिए।
Published on:
22 Jul 2018 12:43 am
