
अपनी माटी में लौटे 12 हजार परिवारों के पास नहीं 'खाद्य सुरक्षा', अब काम मिले तो चल पड़े गाड़ी
अविनाश केवलिया/जोधपुर. कोविड-19 के इस संकट भरे दौर में कई परिवार अपनी माटी की ओर लौटे हैं। जहां एक ओर जोधपुर से कई श्रमिकों का पलायन हुआ है तो वहीं दूसरी ओर कई प्रवासी भी अपने शहर-गांव में आए हैं। इनके सामने अब आजीविका चलाने का संकट है। 12 हजार प्रवासी परिवार तो ऐसे हैं जिनको अभी खाद्य सुरक्षा देने की तैयारी है। ऐसे लोग जिला प्रशासन के सर्वे में चिह्नित हुए हैं।
फैक्ट फाइल
- 85 हजार 405 परिवार खाद्य सुरक्षा के लाभ से वंचित।
- 3 लाख 22 हजार 214 व्यक्ति है इन परिवारों के सदस्य।
- 12 हजार 117 परिवार प्रवासी भी इसमें शामिल
खाद्य सुरक्षा की स्थिति
जिले में 85 हजार 405 परिवार के 3 लाख 22 हजार से अधिक लोग खाद्य सुरक्षा का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन फिलहाल सूची में जुड़े नहीं है। इनमें 12 हजार से अधिक ऐसे परिवार हैं जो कि प्रवासी है। लेकिन इन्हें सिर्फ दो रुपए प्रति किलो के हिसाब से 5 किलो गेहूं की सुविधा ही मिलती है। अभी कोरोना काल के कारण जरूर दाल भी सप्लाई हो रही है।
स्थानीय रोजगार से जुड़े को स्थिति बदल जाए
12 हजार परिवार के करीब 25 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जो कि सीधे स्थानीय रोजगार से जुड़ सकते हैं। जोधपुर जिले की स्थानीय इंडस्ट्री में इनका उपयोग किया जा सकता है। दक्षता और श्रम शक्ति के आधार पर इनका पंजीयन कर सरकार या जिला प्रशासन पहल करे तो इनको रियायत राशन की जरूरत नहीं पड़ेगी और रोजगार से सीधे जुड़ सकेंगे।
लोगों ने खुद लगाई गुहार
इस सर्वे में जिला प्रशासन ने बीएलओ व अन्य मशीनरी लगाई है। लेकिन ई-मित्र के जरिये सीधे आवेदन भी लिए गए। इसलिए इतनी बड़ी संख्या में लोग सामने आए। फिलहाल इनको खाद्य सुरक्षा के लाभ देने की तैयारी की जा रही है।
पत्रिका व्यू
जिस प्रकार से लोगों ने खुद आवेदन कर अपने आप को खाद्य सुरक्षा में शामिल करने और राशन की मांग की है। उसी तरह यदि इनको रोजगार से जोडऩे के लिए एक प्लेटफार्म बनाया जाए तो दो तरफा सफलता मिल सकती है। एक तो इंडस्ट्री में श्रमिकों की कमी को पूरा किया जा सकता है और दूसरी ओर प्रवासियों को रोजगार भी मिल जाएगा।
लघु उद्यमियों ने उद्योगों की समस्या बताई
जोधपुर. लघु उद्योग भाारती की ओर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर उद्योगों की समस्या से अवगत कराया गया। भारती के प्रदेशाध्यक्ष घनश्याम ओझा ने बताया कि उद्योगों पर बिजली के स्थाई शुल्क की मार है। उन्होंने स्थाई शुल्क माफ करने, रीको, माइनिंग व अन्य विभागों के सभी शुल्क माफ करने की मांग की है। ओझा ने बताया कि मुख्यमंत्री वित्त निगम व रीको द्वारा प्रदत्त ऋण में ब्याज दरों की कमी करने की मांग की। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण उद्योगों की हालत खराब है। उन्होंने उद्योगों पर लगने वाले शुल्क को 30 दिसम्बर 2020 तक छूट देने की मांग की।
Updated on:
08 Jun 2020 12:32 pm
Published on:
08 Jun 2020 12:32 pm
