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अमित दवे/जोधपुर. जोधपुर के खानधारक और पत्थर उद्यमी खनिज विभाग, सिम्प्लीफाइड माइनिंग स्कीम (एसएमएस) और एनवायरमेंट क्लीयरेंस (ईसी) में दी गई शर्तों को दरकिनार कर रहे हैं। किसी भी खनन पट्टाधारी की ओर से दी गई एसएमएस में यह कहा जाता है कि खनन क्षेत्र में एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान (ईएमपी) के पौधारोपण किया जाएगा। ईएमपी की शर्तों के अनुसार प्रत्येक खानधारक को प्रतिवर्ष 5 पौधे लगाकर उनका का संरक्षण करना अनिवार्य होता है। यही शर्त ईसी की भी होती है। लेकिन जोधपुर का अधिकांश खनन क्षेत्र हरियाली विहीन है। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है और प्रदूषण फैल रहा है।
उल्लेखनीय है कि क्वारी लाइसेंसधारकों (1 हैक्टेयर क्षेत्र से कम में विकसित खान) के लिए वर्ष 2013 में पहली बार एसएमएस बनी थी, जो वर्ष 2018 में पूरी हो गई है। इस अवधि में लाइसेंसधारकों की ओर से सिर्फ दिखावे के लिए पौधारोपण किया। वास्तव में पौधे लगाए गए होते तो आज खनन क्षेत्र हराभरा होता। लेकिन एक तरफ लाइसेंस धारक ईसी की शर्तों की अनदेखी कर रहे हैं, दूसरी ओर ईसी जारी करने वाले विभागीय अधिकारी और पर्यावरण विभाग इस मामले में मौन साधे हुए है।
यह जानकारी देनी होती है ‘एसएमएस’ में
खानधारक की ओर से क्वारी लाइसेंस संचालन के लिए पेश एसएमएस में पर्यावरण संरक्षण योजना, पौधारोपण, पेड-पौधों संरक्षण के प्रयास, प्लांटेशन का तरीका, क्षेत्र में पानी के छिडक़ाव की व्यवस्था सहित पत्थर उत्पादन की जानकारी देनी होती है।
प्रतिवर्ष पांच हजार पौधे लगाने अनिवार्य
नियमानुसार प्रत्येक खानधारक को प्रतिवर्ष 5 पौधे लगाने होते है। जोधपुर शहर के आसपास करीब 6 हजार खानें संचालित हो रही हैं। इस लिहाज से प्रतिवर्ष 30 हजार और 5 वर्ष में 1.50 लाख पौधे लगाने थे।
हिदायत देंगे
प्रत्येक खानधारक को अपने खनन क्षेत्र में पौधारोपण के लिए समय-समय पर सूचित किया जाता है। विभाग की ओर से जांच कर पौधारोपण की हिदायत दी जाएगी।
श्रीकृष्ण शर्मा, खनिज अभियंता, जोधपुर
Updated on:
05 Oct 2018 10:56 am
Published on:
05 Oct 2018 10:56 am
