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शिक्षकों ने 9 माह से बंद स्कूल में की गुलाबी मशरूम की खेती

शिक्षकों ने जोधपुर केंद्रीय शुष्क अनुसंधान केंद्र (काजरी) के कृषि प्रशिक्षण केंद्र से मशरूम खेती को लेकर जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विद्यालय के खाली पड़े भवन में मशरूम खेती को लेकर बांस की लकडिय़ों से ढांचा तैयार किया। उन्होंने प्रोटीन के प्रमुख स्रोत ऑयस्टर मशरूम की खेती का नवाचार करके एक मिसाल कायम की है।
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शिक्षकों ने 9 माह से बंद स्कूल में की गुलाबी मशरूम की खेती

शिक्षकों ने 9 माह से बंद स्कूल में की गुलाबी मशरूम की खेती

बेलवा (जोधपुर) . वैश्विक महामारी कोरोना काल में एक विद्यालय के शिक्षकों की टीम ने ऑयस्टर मशरूम की खेती करके एक अनूठी मिसाल कायम की है। कोरोना संक्रमण के चलते पिछले आठ माह से राज्य के सभी शिक्षण संस्थान बंद पड़े है। ऐसे में श्री मंगल बाल विद्या मंदिर बेलवा के शिक्षकों ने नवाचार करते हुए मशरूम की खेती शुरू की है।

विद्यालय में शिक्षण कार्य करवा रहे शिक्षकों ने जोधपुर केंद्रीय शुष्क अनुसंधान केंद्र (काजरी) के कृषि प्रशिक्षण केंद्र से मशरूम खेती को लेकर जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विद्यालय के खाली पड़े भवन में मशरूम खेती को लेकर बांस की लकडिय़ों से ढांचा तैयार किया। उन्होंने प्रोटीन के प्रमुख स्रोत ऑयस्टर मशरूम की खेती का नवाचार करके एक मिसाल कायम की है। अब मशरूम प्रोजेक्ट से अब ऑयस्टर (गुलाबी) मशरूम तैयार हो गई है।

किसान होंगे जागरूक


बेलवा सहित आसपास के गांवों के लोग लॉकडाउन में शिक्षकों द्वारा किए गए मशरूम खेती में नवाचार के प्रयासों की सराहना कर रहे है। विद्यालय में उत्पादित गुलाबी मशरूम के लिए अब क्षेत्र के लोगों द्वारा काफी डिमांड भी मिल रही है। नरपतसिंह इन्दा ने बताया कि विद्यालय में मशरूम खेती का नवाचार क्षेत्र के किसानों में जागरूकता पैदा करने के लिए किया है।


ऐसे लगाया प्रोजेक्ट

नरपतसिंह इन्दा ने बताया कि विद्यालय के खाली पड़े भवन को एक डार्क रूम बनाकर ऑयस्टर मशरूम की खेती शुरू की। इसमें पॉलीबैग में स्पॉन अलग-अलग परतों में छिड़काव किया गया। इसे 20 से 25 डिग्री तापमान पर नमी के साथ अंधेरे कमरे में रखा गया। पहली फसल आने में करीब 20 दिन का समय लगता है।

मशरूम की इस प्रजाति में करीब 47 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। इस कारण इसे शाकाहारी लोगों के लिए इसे काफी स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। वहीं आयुर्वेदिक दवा निर्माण करने वाली कंपनियों में ड्राइ ऑयस्टर मशरूम की काफी मांग है। वर्तमान में यह करीब 200 से 250 रुपया प्रति किग्रा के दर से खरीदा जा रहा है।

उगाना आसान, मुनाफा भी भरपूर

ऑस्टर मशरूम उगाना काफी सरल है। नरपतसिंह बताते है कि किसान किसी भी कृषि संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर इसकी सफल खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि इसे उगाने को बड़े खेत का होना आवश्यक नहीं है। छोटे स्तर पर घर के कमरों में भी यह उगा सकते हैं। इस फसल से उत्पादन लागत का कम से कम दो गुना कमाया जा सकता है।

शीत ऋतु की फसल

ऑयस्टर मशरूम कम तापमान और अधिक आद्र्रता में उगाया जाता है। किसान अक्तूबर से मार्च माह तक इसकी खेती कर सकते हैं। इस दौरान 15 दिन के अंतराल पर बुवाई करके किसान कई चरणों की फसल ले सकते हैं। किसान 10 हजार रुपए खर्च कर छोटे स्तर पर भी इसकी खेती की जा सकती है।

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