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धूप में नैनो फिल्टर शुद्ध करेगा टेक्सटाइल इण्डस्ट्री से निकला प्रदूषित पानी

- आइआइटी कानपुर, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज और एमएनआईटी जयपुर ने प्रदूषित पानी के उपचार करने की नई तकनीक विकसित की- वर्तमान में तीन चरण वाली पद्धति से आधा खर्च आएगा, डाई व प्रदूषित तत्व निकल जाएंगे
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धूप में नैनो फिल्टर शुद्ध करेगा टेक्सटाइल इण्डस्ट्री से निकला प्रदूषित पानी

धूप में नैनो फिल्टर शुद्ध करेगा टेक्सटाइल इण्डस्ट्री से निकला प्रदूषित पानी

जोधपुर. वस्त्र उद्योग से निकले प्रदूषित पानी के बेहतर उपचार के लिए देश के तीन संस्थानों ने नई तकनीक विकसित की है। इसमें मुख्य भूमिका नैनो फिल्टर की होगी जो सूर्य के प्रकाश की पराबैंगनी किरणों से प्रदूषित पानी में उपस्थित हानिकारक रसायनों व रंगों से पानी को शुद्ध कर देगा। नई तकनीक का खर्चा वर्तमान पद्धति से करीब आधा आने की संभावना है लेकिन इसके संचालन के लिए कुशल श्रमिकों की आवश्यकता पड़ेगी।
केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी विभाग (डीएसटी) के प्रोजेक्ट के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से संबद्ध एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज और मालवीय नगर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमएनआईटी) जयपुर ने मिलकर पानी उपचारित की नई तकनीक विकसित की है। वर्तमान में परंपरागत तकनीक के तहत प्रदूषित पानी को तीन चरणों में निकालकर शुद्ध किया जाता है लेकिन उसमें फिर भी कार्सिनोजेन (केंसर कारक तत्व) और विषैले तत्व शेष रह जाते हैं।

नैनो फिल्टर में 4 घण्टे रखना पड़ेगा
नई पद्धति में इन तीनों चरणों की जरूरत नहीं होगी। इसमें सबसे पहले प्रदूषित पानी को अमल संवद्र्धित मृदा के संपर्क में लाया जाएगा। उसके बाद प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया के लिए नैनो फिल्टर का उपयोग होगा। नैनो फिल्टर में पानी को 4 घंटे तक रखा जाएगा। पराबैंगनी विकिरण अभिक्रिया से अधिकांश हानिकारक तत्व समाप्त हो जाएंगे। यहां से पानी को कार्बन व पाली एक्रेलोनाइट्राइल फिल्टर से गुजारेंगे, जिसके बाद पानी घरेलू व औद्योगिक उपयोग के लिए पूरी तरह शुद्ध होगा।

जयपुर में पायलट स्तर पर परीक्षण
डीएसटी के वाटर टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव और भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी की सहायता से जयपुर स्थित लक्ष्मी टैक्सटाइल प्रिंटर्स के यहां नई पद्धति का पायलट स्तर पर परीक्षण किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले।

शुष्क क्षेत्रों में पानी की कमी दूर होगी
पानी उपचार के नए पद्धति से शुष्क क्षेत्र में पानी की कमी दूर की जा सकेगी इससे उपचारित पानी को फिर से घरेलू और उद्योगों उपयोग में लिया जा सकेगा।
- प्रो एसके सिंह, प्रोजेक्ट समन्वयक, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज जोधपुर

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