
जेडीए में ठेकेदार संघ के अध्यक्ष ने खुद की फर्म का फर्जी डबल ए क्लास श्रेणी में पंजीयन करवा कर न सिर्फ चार लाख रुपए डकारे, बल्कि करोड़ों रुपए के ठेके लेकर जेडीए कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकार को ७६ लाख रुपए की हानि भी पहुंचाई। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्रकरण की जांच में गड़बडि़यों की पुष्टि होने के बाद शुक्रवार को ठेकेदार संघ के अध्यक्ष को राजसमंद से गिरफ्तार किया। इस सम्बंध में जेडीए के अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक (एसीबी) अजयपाल लाम्बा ने बताया कि प्रकरण में जेडीए ठेकेदार संघ के अध्यक्ष नरेंद्रसिंह सोलंकी को गिरफ्तार किया गया है। उसकी फर्म श्री दुर्गा कंस्ट्रक्शंस की ओर से राजसमंद जिले में कार्य करवाया जा रहा है। जिसके काम के सिलसिले में आरोपी नरेन्द्र सोलंकी भी राजसमंद में था। इसका पता लगने पर एसीबी की राजसमंद टीम ने शाम को उसे पकड़ लिया। जिसे लेकर देर रात तक एसीबी जोधपुर पहुंचेगी। उसे शनिवार को एसीबी मामलात के मजिस्टे्रट के समक्ष पेश किया जाएगा। इस संबंध में एसीबी को मिले परिवाद की जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद तीन माह पूर्व एफआईआर दर्ज की गई थी।
फर्जी डबल ए क्लास में पंजीयन, ५४ ठेके उठाए
मामले की जांच कर रहे ब्यूरो के उपाधीक्षक अनिल पुरोहित ने बताया कि आरोपी नरेन्द्र सोलंकी ने अपनी फर्म श्री दुर्गा कंस्ट्रक्शंस का २ मार्च २०१३ को डबल ए क्लास श्रेणी में जेडीए में रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र लिया था। जबकि जेडीए ने उसकी फर्म को एेसा कोई प्रमाण पत्र दिया ही नहीं था। यानी प्रमाण पत्र फर्जी था। जेडीए में फर्म का डबल ए क्लास श्रेणी में पंजीयन करवाने के लिए चार लाख रुपए जमा करवाने होते हैं। इस प्रमाण पत्र के आधार पर नरेंद्र की फर्म ने करोड़ों रुपए के ५४ ठेके (वर्कऑर्डर) ले लिए। इसमें जेडीए के तकनीकी व वित्तीय कर्मचारियों की मिलीभगत थी।
दस प्रतिशत सिक्योरिटी राशि जमा नहीं करवाई
जेडीए में कार्य के बदले रनिंग बिल के आधार पर ठेकेदार को भुगतान होता है, जिसमें प्रति रनिंग बिल में से दस प्रतिशत सिक्योरिटी राशि काटी जाती है, लेकिन जेडीए कर्मचारियों की मिलीभगत से आरोपी नरेन्द्र सोलंकी ने एक भी रनिंग बिल में यह कटौती नहीं करवाई।
Published on:
04 Nov 2017 03:03 pm
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