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बेनू एस्टेरॉइड का नमूना गिरना बंद, नासा ने नए चैम्बर में डाला

Benu Asteroid अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद अब होगी वैज्ञानिकों की बैठक- भारत के वैज्ञानिकों को अच्छा खासा नमूना मिलने की उम्मीद
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बेनू एस्टेरॉइड का नमूना गिरना बंद, नासा ने नए चैम्बर में डाला

बेनू एस्टेरॉइड का नमूना गिरना बंद, नासा ने नए चैम्बर में डाला

जोधपुर. नासा के स्पेसक्राफ्ट ओसिरिस रेक्स से बेनू एस्टेरॉइड का नमूना गिरना बंद हो गया है। कुछ दिन पहले नासा ने चट्टान व मिट्टी के नमूने को भीतर की तरफ बने एक चैम्बर में खिसका दिया था। नमूना करीब 400 ग्राम है जो अनुसंधान के लिए पर्याप्त है। ओसिरिस रेक्स फिलहाल नमूना लेने के स्थान पर पडऩे वाले प्रभाव को लेकर अभी तक बेनू एस्टेरॉइड के ही चक्कर लगा रहा है। एस्टेरॉइड की पूरी मैपिंग के बाद वह पृथ्वी के लिए रवाना होगा, जहां 2023 में यह पहुंचेगा।

ओसिरिस रेक्स ने 21 अक्टूबर को बेनू की सतह पर अपनी रोबोटिक आर्म से नाइट्रोजन प्रेशर डालकर चट्टान व मिट्टी का नमूना लिया था लेकिन चेम्बर बंद नहीं होने के कारण नमूना धीरे-धीरे अंतरिक्ष में गिर रहा था। नासा को इसको ठीक करने में पांच-सात दिन लग गए। अब नमूना पूरी तरीके से सुरक्षित है। दरअसल बेनू अत्यधिक दूर होने के कारण सिग्नल मिलने में 18 मिनट का समय लग रहा है।

भारत के वैज्ञानिक भी नमूने पर करेंगे अनुसंधान
इस मिशन में विश्व भर के सौ से अधिक वैज्ञानिक शामिल है, जिसमें भारतीय भी हैं। मिशन से जुड़े जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र भण्डारी ने बताया कि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के कारण वहां अभी नासा ने वैज्ञानिकों की बैठक नहीं की। चुनाव संपन्न होने के बाद बैठक होगी। इसमें यह भी पता चलेगा कि किसको कितना नमूना मिलेगा। डॉ भण्डारी भारत और इटली की प्रयोगशाला में रेडियोएक्टिविटी की मदद से इसके 20 लाख वर्ष पहले पृथ्वी की कक्षा में आने का कारण पता लगाएंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है बेनू
बेनू एस्टेरॉइड 4.5 बिलियन वर्ष पुराना है, जितना हमारा सोलर सिस्टम है। ऐसे में जिंदगी की प्रारंभिक अवस्था की जानकारी बेनू के नमूने की जांच से मिलेगी। यह वर्तमान में 20 करोड़ किलोमीटर दूर है। इसका आकार 262 मीटर है। यह भी सूरज के चक्कर लगा रहा है और पृथ्वी की कक्षा में होने के कारण इसके सौ साल बाद धरती से टकराने की आशंका भी वैज्ञानिकों ने व्यक्त की है।

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