9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नाइजीरिया की दशा बदल रही इंडियन कल्चरल एसोसिएशन

एसोएिशन को इस बार भारत सरकार से मिला प्रवासी भारतीय सम्मान जोधपुर के संजय जैन हैं एसोसिएशन के अध्यक्ष
2 min read
Google source verification
नाइजीरिया की दशा बदल रही इंडियन कल्चरल एसोसिएशन

नाइजीरिया की दशा बदल रही इंडियन कल्चरल एसोसिएशन

अविनाश केवलिया. जोधपुर
अफ्रीकी महाद्वीप का सबसे बड़ा देश नाइजीरिया। यहां का जीवन स्तर सुधारने और विकास की ओर ले जाने में प्रवासी भारतीयों का बड़ा अहम किरदार है। स्कूलों में पानी की व्यवस्था करना हो या किसी ओल्ड एज होम में समाजसेवा या फिर कोई सांस्कृति कार्यक्रम ही क्यों न हो, वहां इंडियन कल्चरल एसोसिएशन सबसे अग्रणी होता है। अभी एसोसिएशन इसलिए भी प्रचलित हैं क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी भारतीय सम्मान भी इन्हें मिला है। इस एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष जोधपुर के संजय जैन है और पूरे मारवाड़ का नाम रोशन कर रहे हैं।

एसोसिएशन पिछले कई वर्षों से नाइजरिया में सुविधाएं बढ़ाने के लिए काम कर रही है। भारत सरकार ने जो प्रवासी भारतीय सम्मान दिया है वह हर दो साल में एक बार देते हैं। इनमें से सात या आठ अवार्ड ही संस्थान को मिलते हैं, बाकी अवार्ड व्यक्ति विशेष के होते हैं। उन 7 में से एक इंडियन कल्चरल एसोसिएशन नाइजीरिया है। इस एसोसिएशन के इतिहास में पहली बार यह अवार्ड मिला है और नाइजीरिया ही नहीं हिंदुस्तान व जोधपुर में भी इनके काम की काफी सराहना हो रही है।

29 साल से नाइजीरिया में चीफ जैन
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय ने जोधपुर से 10वी, 12वीं और फिर सीए की पढ़ाई करने के बाद अहमदाबाद व अन्य शहरों में काम किया। 29 साल पहले वे नाइजरिया गए और वहीं बस गए। कई बड़ी कंपनियों में काम किया और साथ ही वहां के प्रवासियों को एकजुट कर सामाजिक गतिविधियों में भी अग्रणी बन गए। इसीलिए उन्हें नाइजीरियन सरकार ने ‘चीफ’ और आशी वाजु (लीडर ऑफ कम्युनिटी, मैन इन फ्रंट) का खिताब भी दिया है। नाइजीरिया के लागोस में रहने वाले संजय एक मैन्युफ्रेक्चरिंग कंपनी में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर कार्यरत हैं। वर्ष 2006 में इन्हें हिंद रत्न अवार्ड भी मिल चुका है जो कि एनआरआई को ही दिया जाता है।

जोधपुर से काफी लगाव

संजय जैन का पैतृक निवास घोड़ा चौक के समीप ही था। उनके दादा की हवेली थी और बाद में पिता पश्चिमी बंगाल में काम करने के लिए चले गए। लेकिन कुछ समय बाद पारिवारिक कारणों से संजय जोधपुर लौट आए और यहीं पढ़ाई की। दो पुत्र हैं, जिनमें एक कुवैत में रहता है और दूसरा डॉक्टर है। संजय अपनी कर्मभूमि के साथ मातृभूमि के लिए बहुत कुछ करने का जज्बा रखते हैं।

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग