
अस्पतालों के बाहर कॉमर्शियल व इण्डस्ट्रियल जोन के बराबर ध्वनि प्रदूषण
जोन में मानक की तुलना में 10 से 25 प्रतिशत अधिक ध्वनि प्रदूषण
जोधपुर.
शहर के अस्पतालों का क्षेत्र साइलेंट जोन घोषित है, लेकिन कामर्शियल व इण्डस्ट्रियल जोन के बराबर ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। मानकों की बात करें तो यहां 10 से 25 प्रतिशत अधिक ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। इससे मरीज परेशान हैं। दिन ही नहीं रात के समय में भी ध्वनि प्रदूषण से राहत नहीं हैं।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से साइलेंस जोन (अस्पताल क्षेत्र) में ध्वनि प्रदूषण का मानक 50 डेसीबल निर्धारित है, लेकिन साइलेंस जोन में ध्वनि के जो आंकड़े हर माह मिल रहे हैं, उसके अनुसार अस्पतालों के साइलेंस जोन में कॉमर्शियल व इण्डस्ट्रीयल जोन के बराबर ध्वनि प्रदूषण है।
अस्पतालों के क्षेत्र में दिन के समय 10 से 25 प्रतिशत अधिक प्रदूषण है तो रात में भी यह प्रदूषण बढ़ भी जाता है। प्रदूषण मापने की अवधि में यानि रात दस बजे से रात 12 बजे के अन्तराल में भी प्रमुख अस्पताल ध्वनि प्रदूषण के कारण परेशान रहते हैं। विशेषकर महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर दिन के समय 73 डेसीबल की ध्वनि का प्रदूषण हो रहा है। यहां शाम के बाद यानि रात 12 बजे तक यह प्रदूषण 7 प्रतिशत और बढ़ जाता है।
बरसात में भी राहत नहीं-
प्रदूषण मंडल के अनुसार सर्दी व गर्मी के समय ध्वनि की सापेक्ष गति तेज होती है, ऐसे में साइलेंट जोन में जो भी ध्वनि आती है, वह आराम व शांति को भंग करती है। बरसात के समय में ध्वनि की गति कम होती है, इसलिए प्रदूषण कुछ कम होता है, लेकिन जोधपुर में शुष्क व अधिक ऊष्मा अधिक रहने से बरसात के दौरान भी ध्वनि प्रदूषण का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है।
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साइलेंट जोन
अस्पताल मानक ध्वनि(दिन/रात) प्राप्त ध्वनि(दिन/रात)
एमजीएच 50/40 73.5/77.8
उम्मेद 50/40 71/63.3
एमडीएमएच 50/40 70.7/57.1
एम्स 50/40 58.3/59.8
पावटा 50/40 62.4/61.2
(ध्वनि का माप डेसीबल है)
तेज ध्वनि श्रवण शक्ति के लिए घातक
डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के इएनटी विभाग के प्रो. डॉ. नवनीत अग्रवाल के अनुसार तेज ध्वनि तो मरीज ही नहीं बल्कि आम लोगों की श्रवण शक्ति को प्रभावित कर सकती है। मरीजों के तेज आवाज सुनने से चिड़चिड़ापन होने एवं श्रवण शक्ति को नुकसान हो सकता है।
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अस्पताल के बाहर हॉर्न न बजाने की अपील
जोधपुर. यातायात पुलिस की ओर से चल रहे 'यातायात शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रमÓ अभियान के तहत महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर वाहनों के हॉर्न न बजाने की अपील की गई है।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) निर्मला विश्नोई ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से 'नो हॉकिंग' के तहत अभियान चलाया जा रहा है। उप निरीक्षक पंकजराज माथुर के नेतृत्व में एमजीएच के बाहर पुलिस के जवानों ने हाथों में होर्डिंग लेकर मानव शृंखला बनाई और ध्वनि प्रदूषण न करने का संदेश दिया।
Published on:
25 Aug 2018 08:36 pm
