9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सौ बीघा का राजलाव तालाब मात्र 21 बीघा में सिमट कर रह गया

बिलाड़ा. सैकड़ों कुंओं को रिचार्ज करने एवं कस्बे की कुंओं-बावडिय़ों के पानी को मीठा बनाए रखने की क्षमता रखने वाला राजलाव तालाब अब कचरा पात्र बन चुका है।  
2 min read
Google source verification
Now Rajlaw Pond of Bilara has become dustbin

सौ बीघा का राजलाव तालाब मात्र 21 बीघा में सिमट कर रह गया

बिलाड़ा (जोधपुर) . सैकड़ों कुंओं को रिचार्ज करने एवं कस्बे की कुंओं-बावडिय़ों के पानी को मीठा बनाए रखने की क्षमता रखने वाले राजलाव तालाब की वर्तमान में ऐसी दुर्दशा हो चुकी है कि सौ बीघा क्षेत्र का यह तालाब सिमट कर मात्र 21 बीघा में ही रह गया है वह क्षेत्र भी अब कचरा पात्र बन चुका है।


रायपुर बांध पर चादर चलने के पश्चात जो पानी चौपड़ा बांध के लिए कस्बे के निकट से बहने वाली नहर के जरिए गुजरता था, उस पानी में बिलाड़ा कस्बे का हक लगता है तथा दशकों से नहर में बड़ी मोहरी रखी हुई थी, जिसके जरिए पानी राजलाब तालाब तक पहुंचता था और तालाब के लबालब भरने के पश्चात इस पर चलने वाली चादर का पानी पुन: चौपड़ा फीडर में मिल जाता था।

इस प्रकार सौ बीघा क्षेत्र का यह तालाब बारह मास मीठे पानी से भरा रहता तथा आस-पास के कुंए-बावडिय़ों में भी मीठा पानी रहता। साथ ही कृषि कुंओं का जलस्तर भी ऊंचा रहता, जिन पर मात्र तीन या पांच होर्स पावर की मोटरों से किसान खेत की पिलाई कर लेता था।


राजलाव तालाब की दुर्दशा का सिलसिला तब शुरू हुआ जब वोटों की राजनीति के खातिर तालाब की सीमा में जातिगत संस्थाओं, कृषि उपज मंडी एवं अन्य विभागों को उनके भवन बनाने के लिए जमीने आवंटन की जाने लगी।

96 बीघा 3 विस्वा क्षेत्रफल के इस तालाब के केचमेंट क्षेत्र में से 33 बीघा कृषि उपज मंडी के लिए पौने दो बीघा महिला एवं बाल विकास परियोजना के कार्यालय एवं भवन के लिए, एक बीघा पांच विस्वा जमीन मेघवाल समाज के लिए आवंटित कर दी गई। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना में भी इस जनोपयोगी तालाब को नहीं संवारा जा सका, जबकि पालिका बोर्ड की बैठक में इसके लिए कई बार प्रस्ताव पारित किए जा चुके है।


सौ बीघा क्षेत्र के इस तालाब की परिधि में से ज्यों-ज्यों भूमि का आवंटन होता गया तथा तालाब का क्षेत्रफल घटता गया तो पंचायत से नगरपालिका का रूप ले चुके कस्बे के लोगों ने ही इसे कचरा पात्र बना डाला। इस तालाब को कचरे से भरा जाने लगा तो आस-पास की बस्ती के लोगों ने भी इसे शौच स्थान बना डाला। वर्तमान में कस्बे के कई मोहल्लों से बहकर आने वाले गंदे पानी को भी इसी तालाब में डाला जा रहा है, जिससे सम्पूर्ण वातावरण दुर्गन्ध भरा रहता है।

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग