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उलझनों के ब्रिज में अब फिर फंसा पेंच, आरयूबी पर मंडराए संकट के बादल

महेश कुमार सोनीफलोदी. शहर के अंबेडकर सर्किल के निकट स्थित रेलवे क्रॉस-५८ पर दिन भर रेलगाडिय़ों के आवागमन के कारण यहां लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए रेलवे अण्डर ब्रिज को स्वीकृति प्रदान की गई थी। कई दिक्कतों से जंूझने के बाद इस रेलवे अण्डर ब्रिज निर्माण के लिए ११.७४ करोड़ की राशि मिली, तो यहां जून २०१६ में कार्य शुरू हो गया। फिर यहां रिटेनिंग वॉल व ब्लॉक्स तैयार करने के बाद रेलवे की सीआरए स्वीकृति के इंतजार में करीब डेढ़ से ज्यादा का समय बीत गया और स्वीकृति नहीं मिल पाई। अब रेलवे ने यहां पटरियों के नीचे स्वीकृति देने के लिए सहमति जताई तो, एनएच-११ पर एलसी-५७ पर बन रहे रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण के दौरान टै्रफिक डायवर्जन का पेंच आरयूबी में आकर फंस गया है। जिसके चलते आरयूबी में फिर से देरी की आशंकाएं बनने लगी है। वहीं दूसरी तरफ सालों के इंतजार के बाद इस ब्रिज का निर्माण शुरू होने व निर्माण शुरू होने के बाद लगातार हो रही देरी को लेकर स्थानीय प्रशासन ने भी कोई खास गंभीरता नहीं दिखाई है।
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एलसी- 58 आरयूबी को सालों बाद जगी रेलवे स्वीकृति की आस, अब आरओबी के ट्रैफिक डायवर्जन में फंसा आरयूबी का निर्माण

एलसी- 58 आरयूबी को सालों बाद जगी रेलवे स्वीकृति की आस, अब आरओबी के ट्रैफिक डायवर्जन में फंसा आरयूबी का निर्माण


यूं फंसा पेंच-
दरअसल मामला कुछ यूं है कि एलसी ५८ रेलवे क्रॉस पर अण्डरब्रिज बनना है तथा वहां पटरियों के नीचे खुदाई करके गर्डर डालने के लिए आरएसआरडीसी रेलवे स्वीकृति की मांग रहा है। अब आरएसआरडीसी का कहना है कि रेलवे से हुई बातचीत में१४-१५ मई को रेलवे ब्लॉकेज दे देने पर सहमत है, लेकिन एनएच-११ पर एलसी-५७ रेलवे फाटक पर चल रहे रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण के दौरान यहां भी ब्लॉकेज के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन को लेकर आरयूबी की सीआरए स्वीकृति उलझ गई है।
बार-बार लगता है जाम-
एलसी-५८ रेलवे फाटक फलोदी शहर में ही स्थित है तथा शहर से कृषि मण्डी, जोधपुर चौराहा, बापू नगर, मॉडल स्कू ल, एडीएम ऑफिस, न्यायालय आदि जगहों व बाहर की तरफ अन्य गांव शहरों की तरफ जाने के लिए अधिकांश लोग इस सड़क से गुजरते है, लेकिन इस फाटक से दिन-भर रेलगाडि़यों के आवागमन के कारण फाटक बार-बार बंद हो जाता है। जिससे फाटक के दोनों तरफ वाहनों की लम्बी कतारें लग जाती है।
ढाई साल की हो गई देरी-
आरयूबी निर्माण का सफर शुरूआत से ही उलझनों से भरा रहा है। कभी तकनीकी खामियों को दूर करने, कभी रेलवे की एनओसी नहीं मिलने के चलते यहां निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया था, फिर निर्माण शुरू हुआ तो पिछले लम्बे समय रेलवे ब्लॉकेज की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण यह काम अधूरा ही पड़ा है। गौरतलब है आरयूबी निर्माण जून २०१६ में शुरू हुआ था तथा आरएसआरडीसी द्वारा जनवरी २०१७ तक निर्माण पूर्ण करने की समय सीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन निर्माण में ढाई साल से अधिक समय की देरी बाद भी आरयूबी मूर्त रूप नहीं ले सका है। वर्तमान में मौके पर रिटेनिंग वॉल व ब्लॉक्स तैयार पड़े है तथा पटरियों के नीचे लगाने के लिए गर्डर भी बनवाकर मौके पर रखे गए है। (कासं)
क्या कहते है अधिकारी-
-एनएच-११ पर चल रहे रेलवे ऑवर ब्रिज निर्माण के दौरान ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए दो वैकल्पिक मार्ग है। जिसमें एक राईका बाग व दूसरा एलसी-५८ रेलवे फाटक। अगर एलसी-५८ रेलवे फाटक पर आवागमन बंद हो जाता है, तो ट्रैफिक डायवर्ट करने में परेशानी आएगी।
राजेन्द्रसिंह चारण, एडीएम, फलोदी
- हाल ही में रेलवे से हुई बातचीत में रेलवे ने सीआरए स्वीकृति के लिए सहमति जताई है तथा १४-१५ मई को ब्लॉकेज दे सकते हैं। इस आरयूबी का कार्य पिछले लंबे समय से बंद पड़ा है तथा यह कार्य पूर्ण करने के लिए समय पर सीआरए स्वीकृति की आवश्यकता है। एनएच के ओवरब्रिज के ट्रैफिक डायवर्जन को लेकर अगर स्वीकृति में देरी होगी तो आरयूबी निर्माण में भी काफी देरी होने की आशंका है।
योगेन्द्र शर्मा, निदेशक, आरएसआरडीसी, यूनिट-प्रथम, जोधपुर

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