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दक्षिण एशियाई देशों और अमरीका के एनआरआई मुश्किल दौर से गुजर रहे

जोधपुर ( jodhpur news.rajasthan news ) .दक्षिण एशियाई देशों ( south Asian countries ) और अमरीका ( america hindi news ) के एनआरआईज ( india news in hindi ) बहुत मु श्किल दौर से गुजर रहे हैं। इधर अमरीका में एच 1 ( H1 visa ) और एल 1 वीजा ( L1 visa ) मिलना बहुत कठिन हो गया है। अमरीका ( USA ) स्थित एनआरआई फाउंडेशन ( NRI Foundation ) के संस्थापक अध्यक्ष ( founder chairman ) दीपक कावडि़या ( Deepak Kavadia ) ने अमरीका से पत्रिका के साथ मोबाइल पर बातचीत ( india news in hindi ) में इस आशय की जानकारी दी।
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जोधपुर

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MI Zahir

Jan 27, 2020

NRIs of South Asian countries and USA are going through difficult times

NRIs of South Asian countries and USA are going through difficult times

एम आई जाहिर/ जोधपुर ( jodhpur news.rajasthan news ) . दक्षिण पूर्व एशियाई देशों ( latest asia news in hindi ) के अप्रवासी लोग कठिन समय और दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। वहीं अमरीका ( america hindi news ) में रह रहे भारतवंशी ( india news in hindi ) नागरिक भी इन दिनों बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। अमरीका स्थित एनआरआइ फाउंडेशन

( NRI Foundation ) के संस्थापक अध्यक्ष ( founder chairman ) दीपक कावडि़या ( Deepak Kavadia ) ने अमरीका से मोबाइल पर बातचीत में पत्रिका से यह बात कही। उन्होंने बताया कि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन बेरोजगारी दर को न्यूनतम रखने और स्थानीय रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ट्रम्प प्रशासन के लिए अप्रवासी सबसे कम प्राथमिकता वाले हैं। नतीजतन एच 1 ( H1 visa ) और एल 1 वीजा ( L1 visa ) कठिन हो रहे हैं। एनआरआई फैडरेशन की ओर से हम 2019-2020 में ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए सबसे कठिन समय देख रहे हैं और जिनके पास ग्रीन्स कार्ड ( green card ) हैं और जो यूएसए में 5 साल से अधिक समय से रह रहे हैं, वे बिना किसी और देरी के सिटीजन ( citizenship ) के लिए आवेदन कर रहे हैं। कावडि़या ने बताया कि सिटीजन एप्लिकेशन में इस तरह की हड़बड़ी का एक अन्य कारण भारतीय अर्थव्यवस्था का धीमा चरण है और विकास दर 5 प्रतिशत से कम है और भारत में बेरोजगारी बहुत अधिक है। भारतीय अमरीकी अब इस खतरे को देख रहे हैं कि ट्रम्प प्रशासन आव्रजन नीतियों और नागरिकता नियमों के मामले में सख्त हो रहा है। जबकि भारतीय अमरीकी भी संयुक्त राज्य अमेरिका ( USA ) में सबसे अधिक कर दाताओं में से एक हैं। उल्लेखनीय है कि यूएसए में 120,000 चिकित्सक भारतीय-अमरीकी मूल के हैं। वहीं 90,000 सुविधा भंडार भारतीय-अमरीकियों के स्वामित्व में हैं। इसके अलावा 22,000 मोटल और होटल भी भारतीय-अमरीकियों के स्वामित्व में हैं।

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