
चोरी हुए वाहन की बीमा राशि देने का आदेश
जोधपुर.जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने उपभोक्ताओं के हित में दो फैसले कर राहत प्रदान की है। पहले मामले में आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को चोरी हुए स्कूटर की बीमा राशि उपभोक्ता को देने का आदेश दिया। वहीं दूसरे मामले में शहर के एक फर्नीचर विक्रेता द्वारा खराब फर्नीचर बेचने को अनुचित व्यापार मानते हुए उपभोक्ता को हर्जाना देने का आदेश दिया।
बीमा क्लेम देने का आदेश
मसूरिया निवासी भगवतीलाल ने अधिवक्ता योगेश ओझा के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश कर बताया कि उसका स्कूटर पालरोड स्थित अशोक उद्यान के बाहर से चोरी हो गया। एफआईआर दर्ज करवाई तथा पुलिस ने कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी,इस आधार पर उपभोक्ता ने बीमा राशि का क्लेम किया लेकिन बीमा कंपनी ने तकनीकी आधार पर क्लेम खारिज कर दिया। आयोग ने इसे अनुचित मानते हुए उपभोक्ता को 29315 रुपये बतौर बीमा क्लेम तथा तीन हजार रुपये परिवाद व्यय के देने का आदेश दिया।
खराब फर्नीचर बेचने पर 15 हजार का हर्जाना
दूसरे मामले के अनुसार जालोरी गेट निवासी विजयप्रसाद ने आयोग के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि शनिश्चर जी का थान स्थित एक फर्नीचर शौरूम से जुलाई 2017 में डबल बैड खरीदा जिसे शीशम की लकडी का होना बताया किन्तु कुछ दिनों बाद ही इसका कलर खराब होने लगा। फर्नीचर विक्रेता की ओर से माल पर ‘नो गारंटी-नो वारंटी’ होने से हवाला देते हुए कहा कि इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है। आयोग के अध्यक्ष श्यामसुन्दर लाटा,सदस्य अनुराधा व्यास तथा आनंदसिंह सोलंकी ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को विधायिका ने उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा व विक्रेताओं की मनमानियों पर अंकुश लगाने के लिए ही लागू किया है। ‘नो गारंटी-नो वारंटी’ की शर्त अवैध होने से मान्य नहीं है। आयोग ने फर्नीचर विक्रेता को खराब माल विक्रय करने व अनुचित व्यापार-व्यवहार का दोषी मानते हुए परिवादी ग्राहक को मानसिक व शारिरीक वेदना की क्षतिपूर्ति के रूप में पन्द्रह हजार रुपए व परिवाद व्यय पांच हजार रुपए देने का आदेश दिया।
Published on:
02 Apr 2021 07:00 pm
