
चार साल की बेटी की कस्टडी मां को सौंपने के आदेश
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता के पास रह रही चार साल की बेटी की कस्टडी मां को सौंपने के आदेश दिए हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौते की संभावना का पता लगाया गया, लेकिन फिलहाल दोनों विवाद को निपटाने के लिए राजी नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना को और तलाशने की जरूरत है। इसलिए अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश अरुण भंसाली की खंडपीठ में याचिकाकर्ता एक मां की ओर से दायर बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता चार साल की बच्ची की मां है, जिसका आरोप था कि उसकी बेटी को पति जबरन ले गया और उसे अवैध रूप से कैद में रखा है। कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को बेटी को लेकर पिता कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुआ।
बच्ची की कस्टडी के सवाल पर खंडपीठ ने पाया कि हिन्दू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 6 के उपखंड (ए) के प्रावधानों के अनुसार, एक लडक़े या एक हिंदू अविवाहित नाबालिग लडक़ी के प्राकृतिक अभिभावक पिता होते हैं और उसके बाद मां होती है, लेकिन नाबालिग की कस्टडी जिसने पांच साल की उम्र पूरी नहीं की है, आम तौर पर मां के पास रहती है। कोर्ट ने धारा 6 और 13 के प्रावधानों और अवयस्क बच्ची के समग्र कल्याण को ध्यान में रखते हुए उसकी कस्टडी याचिकाकर्ता मां को सौंपने का निर्देश दिया।
Published on:
14 Aug 2021 07:47 pm
