
ऑर्गेनिक फॉर्मिंग: पं राजस्थान में अपार संभावनाएं
जोधपुर।
वैश्विक रूप से ऑर्गेनिक फॉर्मिंग की ओर बढ़ते रुझान व पश्चिमी राजस्थान में इस पद्दति की अपार संभावनाओं ने जिले के किसानों में जैविक कृषि पद्दति अपनाने को प्रोत्साहित किया है। जिले में 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक पद्दति से खेती होती है, लेकिन किसानों को जैविक पद्दति में अपनाई जाने वाली गतिविधियों की पूर्ण जानकारी नहीं होने व प्रमाणीकरण के अभाव में पहचान नही मिल पा रही है। केंद्र सरकार की ओर से जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जिले में 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का पीजीएस के जैविक उत्पादन क्षेत्र के रूप में प्रमाणीकरण हुआ। वहीं करीब 200 किसानों ने 900 हेक्टेयर में व्यक्तिगत प्रमाणीकरण करवाकर जैविक खेती कर रहे है। इससे जिले में प्रमाणित रूप से 12500 हेक्टेयर में जैविक कृषि हो रही है।
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पूर्ण जैविक कृषि उत्पादन क्षेत्र बन सकता है जिला
जिले में 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में से 8 लाख से अधिक क्षेत्र में कभी रसायन का उपयोग नही किया गया। वहीं 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कभी न कभी नाममात्र के रसायन का प्रयोग किया गया है। ऐसे में जिले के 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सामान्य प्रशिक्षण व प्रमाणीकरण के जरिए जैविक कृषि क्षेत्र घोषित किया जा सकता है। शेष 4 लाख हेक्टेयर में से अधिकांश सिंचित क्षेत्र है, जिसे तीन वर्ष में धीरे-धीरे वैकल्पिक जैविक खादों के प्रयोग से पूर्ण जैविक में बदल सकते है।
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जिले की फेक्ट फ ाइल
- 14 लाख हेक्टेयर कुल कृषि क्षेत्र
- 8 लाख हेक्टेयर प्राकृतिक खेती क्षेत्र
- 2 लाख हेक्टेयर आंशिक रसायनयुकत क्षेत्र
- 4 लाख हेक्टेयर रसायन पद्दति से खेती क्षेत्र
- 12500 हेक्टेयर प्रमाणिक जैविक कृषि क्षेत्र
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जहरीले रसायनों से बढ़ती बीमारियों, बंजर जमीन व खेती की बढ़ती लागत का कारण रासायनिक पद्दति से हो रही खेती है। जैविक पद्दति अपनाकर ही किसान बाजार आधारित खेती को पुन: खेत आधारित बनाकर आर्थिक रूप से लाभकारी बना सकता है। भारतीय किसान संघ इसके लिए लगातार प्रयासरत है।
रतनलाल डागा, राष्ट्रीय जैविक प्रमुख
भारतीय किसान संघ
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Published on:
31 Aug 2021 10:32 pm
