कोरोना के बाद लिविंग रूम में ऑक्सीजन प्लांट का क्रेज

- साज-सज्जा के साथ मेडिकल डिमांड भी

- शहर की नर्सरियों में खूब हुई इसकी आवक

 

By: Avinash Kewaliya

Published: 27 Jun 2021, 10:41 PM IST

अविनाश केवलिया. जोधपुर

कोरोना के कारण हमारी दिनचर्या और घर की इंटीरियर में काफी बदलाव आया है। लेकिन पेड़-पौधों के प्रति भी जागरूकता आई है। खास बात यह है कि अपने लिविंग स्पेस में भी ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए अब प्लांट्स का चुनाव भी इसी प्रकार से करने लगे हैं। कई ऐसे इंडोर प्लांट है जिनको बेडरूम-ड्राइंग रूम में रखने का चलन बढ़ गया है। इन पौधों की खासियत यह है कि यह सुंदर तो दिखते ही है साथ ही इंडोर रहते हुए कार्बन डाई ऑक्साइड व अन्य विषैली गैस ग्रहण कर ऑक्सीजन निकालते हैं।

24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला स्नेक प्लांट
संसेविया ट्रिफसिआटा नाम का यह पौधा इंडोर प्लांट है। जीभ की तरह लंबा होता है। यह 24 घंटे ऑक्सीजन देने की विशेषता रखता है। छोटे गमले के माध्यम से सिराहने भी रखते हैं। यह प्लांट सूरज ढलने के बाद भी ऑक्सीजन रिलीज करता है। मानव शरीर से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड को ग्रहण कर लेता है। कम पानी में और कम सूर्य की रोशनी में यह हरा-भरा रहता है

कोरोना के बाद लिविंग रूम में ऑक्सीजन प्लांट का क्रेज

औषधीय गुण वाला अरलिया
अरलिया एक इंडोर प्लांट है यह एक तरह का औषधीय गुण भी रखता है। दिखने में यह पौधा खूबसूरत है ही। इस पौधे को बैडरूम में रख सकते हैं और इसके पत्ते को छूने से तनाव कम हो जाता है। इसको भी ज्यादा मेंटनेंस की जरूरत नहीं पड़ती, ऑक्सीजन भी अच्छी मात्रा में उत्सर्जित करता है।

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एयरप्योरिफायर है पीस लिली
पीस लिली इसके नाम के पीछे एक फैक्ट यह है कि गहरे हरे रंग होने के बीच सफेद रंग की पत्तियां होती है। इसलिए इसे पीस लिली कहा जाता है। घर के अंदर टॉक्सिन, कार्बन डाई ऑक्साइड और बैंजीन जैसे तत्व को सोख कर एयर प्यूरिफायर का काम करता है।

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आयुर्वेदिक महत्व वाला स्पाइडर
स्पाइडर प्लांट अफ्रीकी मूल का पौधा है और जिसका वैज्ञानिक नाम क्लोरोफाइटम कोमोसम है। यह प्लांट घर की जहरीली गैस को ऑब्जर्ब करने में सहायक है। इसका आयुर्वेद में भी काफी महत्व है। इसकी जड़ों से ही सफेद मूसली बनाई जाती है। यह कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मल्डिहाइड जैसी गैसों को को हटाने में प्रभावी है।

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प्रियांशु सांखला, बालाजी नर्सरी के एक्सपर्ट

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) दीप नारायण पांडेय बताते हैं कि एक व्यक्ति को पूरे जीवन में ऑक्सीजन के लिए आठ बड़े वृक्षों की आवश्यकता होती है। लेकिन घर के अंदर पौधे रखने का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। यह कई शोध इसे प्रमाणित करते हैं। इन प्लांट्स के अलावा तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा जैसे पौधों को भी इंडोर रखा जा सकता है। एक ही प्रकार के इंडोर प्लांटस के दो सेट्स रखिये, ताकि बारी-बारी उनको धूप व खुले में रखा जा सके। जोधपुर के नर्सरी विशेषज्ञ प्रियांशु सांखला बताते हैं कि इस प्लांटस की इस बार काफी डिमांड है और इनको लगाने के संबंध में पूरी तरह से निर्देश भी हम देते हैं।

Avinash Kewaliya
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