
Pakistan Minorities: जोधपुर। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार तो होता है। इन्हें सिर्फ सफाई कर्मी की नौकरी दिए जाने से पहले भी सरकारी विज्ञापनों में 'सिर्फ गैर मुस्लिमों योग्य' लिखकर जलील किया जाता है। नौकरी लगाने के बाद भी बहुसंख्यक वर्ग के लोग और अधिकारी अल्पसंख्यकों के साथ बड़े ही अमानवीय तरीके से पेश आते हैं। यहां तक कि किसी हादसे के बाद इन्हें बचाने की कोशिश तक नहीं होती और मौत के बाद भी बेहद कम मुआवजा दिया जाता है।
पाकिस्तान के राष्ट्रीय मानवाधिकारी आयोग की 'असमान नागरिकः अल्पसंख्यकों के प्रति व्यवस्थागत भेदभाव का अंत' विषयक रिपोर्ट में ऐसे कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। खुद मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष राबिया जवेरी आघा ने 88 पृष्ठों की रिपोर्ट का प्राक्थन लिखते हुए इस बात पर हैरानी जताई कि अल्पसंख्यकों के साथ न सिर्फ भेदभाव किया जाता है, बल्कि इनके लिए जॉब वैकेंसी के विज्ञापनों में भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल होता है। सफाई कर्मी की भर्ती के लिए निकलने वाले विज्ञापनों के योग्यता कॉलम में 'सिर्फ गैर मुस्लिमों के लिए' जैसे शब्द लिखे जाते हैं। आयोग ने ऐसे 300 से ज्यादा विज्ञापन चिह्नित कर सरकार को ऐसी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमान न करने की हिदायत दी है। वे कहती हैं कि 'रोजगार में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ सरकारी एजेंसियों का भेदभाव न सिर्फ असंवैधानिक बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के विरुद्ध है।'
आरक्षण सिर्फ कागजों में
पाकिस्तान सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए साल 2009 में पांच प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की थी। इसके तहत अधिकारी से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के सभी 22 वेतन श्रृंखलाओं के पदों में आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन आरक्षण का यह कोटा भरने में भी कारस्तानी सामने आई। सिंध व पंजाब समेत सभी प्रांतीय सरकारें अधिकांश आरक्षित पद सिर्फ सफाई कर्मचारियों से ही भरकर पांच फीसदी आरक्षण पूरा कर रही हैं।
नहीं देते पूरी पगार तक
सिंध प्रांत में न्यूनतम मजदूरी 25 हजार रुपए प्रतिमाह निर्धारित है, लेकिन अल्पसंख्यक कार्मिकों को यह भी पूरी नहीं मिलती। अध्ययन के दौरान सामने आया कि ऐसे कार्मिकों को अस्थाई नौकरी के लिए भी बांड पर 20 हजार रुपए देने का उल्लेख है, लेकिन असल में तनख्वाह 10 से 15 हजार थमा दी जाती है।
Published on:
04 Jun 2022 04:05 pm
