
परिजन बोले, अस्पताल से सीधा जेल जाए
जोधपुर.
पत्नी व पुत्र की हत्या कर आत्महत्या की साजिश रचने वाले गजेन्द्र को हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर जेल से बाहर निकालने व सजा से बचाने के लिए परिजन ने करीब पचास लाख रुपए खर्च किए थे। गजेन्द्र का भाई किशोरसिंह जुआ व सट्टे लगाने का आदी था। उसने पन्द्रह-बीस लाख का कर्जा होने के बाद वर्ष २०१६ में आत्महत्या की थी। पुलिस के अनुसार यह कर्ज भी परिजन ने चुकाया था। अब कर्ज में डूबे दूसरे पुत्र की इस करतूत से माता-पिता और घरवाले सकते में हैं। उनका पुलिस से आग्रह है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने पर गजेन्द्र को सीधे जेल की सलाखों में डाल दिया जाए।
गजेन्द्र के ऊंचे शौक हैं। उसकी चार-पांच महिला मित्र भी हैं। उसने वर्ष २०१५ में एक रुपए प्रति सैंकड़ा के हिसाब से १३-१४ लाख रुपए उधार लिए थे। नोटबंदी के चलते उसके लेन-देन का रोटेशन टूट गया और धीरे-धीरे कर्ज का बोझ बढ़ता गया। गत जुलाई से उसने ब्याज चुकाना भी बंद कर दिया था।
अस्सी सदस्यों के साथ शुरू की दो वीसी
वर्ष २०१६ में गजेन्द्र ने ऑफिस स्टाफ के लिए एक लाख व बाहरी लोगों के लिए छह लाख रुपए प्रति माह की दो वीसी शुरू की। दोनों में करीब अस्सी सदस्य थे। दोनों वीसी से उसने कुछ महीने तो उधार चुकाए, लेकिन कर्जा अधिक होने पर चुकाना बंद कर दिया।
मालिक को भी लगा चुका लाखों की चपत
इलेक्ट्रोनिक शोरूम में मार्केटिंग प्रबंधक गजेन्द्र उधार वसूली करता था। शोरूम मालिक उससे २१ लाख, बंशीलाल ११ लाख, हरिकिशन खत्री पौने आठ लाख, हरीश खत्री व एक-दो अन्य व्यक्ति भी लाखों रुपए मांग रहे थे। उसने महिला मित्रों को कुछ हजार रुपए उधार दे रखे थे। जबकि बही खातों में इनसे लाखों रुपए प्राप्त करना दर्शा दिया।
साजिश एेसी कि कोई शक न करे
गजेन्द्र ने वारदात से दो-तीन दिन पहले ही घरवालों को कर्जा अधिक होने व अन्य परेशानी से अवगत कराया था। फिर एक ही दिन में बही खातों में फर्जी एंट्रियां की। जिनसे वह लगातार दो सौ-तीन सौ रुपए प्राप्त कर रहा था। उनसे एकदम लाखों रुपए प्राप्त करना दिखा दिया। उसने दो लेनदारों को २६ नवम्बर की शाम १८ लाख रुपए चुकाने का समय दिया था। शाम को उसने दोनों से कह दिया था कि रात को रुपए आएंगे इसलिए वह २७ नवम्बर की सुबह चुका देगा। लेकिन सुबह होने से पहले उसने पत्नी की हत्या कर लूट की साजिश रच डाली।
आभूषण घर में मिलने व भाई के यह कहने से कि रुपए घर में नहीं थे, गजेंद्र का झूठ उजागर हो गया।
टीवी सीरियल से उपजी साजिश
आरोपी गजेन्द्र अपराध आधारित टीवी सीरियल देखने का शौकीन है। इसीसे उसके दिमाग में यह साजिश आई थी। वारदात के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तो टीवी में यही सीरियल चल रहा था।
एेसे खुली साजिश की परतें
गजेंद्र ने तीन-चार नकाबपोश के घर में घुसकर चाकू से हमला व लूटपाट की बात कही थी। पुलिस को मौके पर घर में सिर्फ सामान बिखरा मिला। किसी बाहरी व्यक्ति के पैरों और हमलावरों से संघर्ष के निशान तक नहीं थे।
- विरोधाभासी बयान
- वारदात में प्रयुक्त तीनों चाकू उसी घर के निकले। जो मौके पर ही मिल गए थे। एक चाकू काम नहीं लिया गया था।
- चारों भाइयों के के घर के बरामदे एक ही हैं। उन्होंने कोई आहट तक नहीं सुनीं। पड़ोसी भी चार बजे जाग जाते हैं, लेकिन उन्होंने भी कोई आवाज या किसी को भागते नहीं देखा था।
- घर में खून से सने चाकू व बाहर पिस्तौल मिल गई थी। कोई भी हमलावर हथियार छोडक़र नहीं जाता।
- सीढि़यों पर खून के निशान मिले। अंदेशा है कि हथियार पकड़े जाने की आशंका के चलते वह पिस्तौल फेंकने छत पर गया होगा। घरवालों ने ही पुलिस को बताया था कि हमलावर हथियार सामने फेंककर गए हैं।
Published on:
05 Dec 2018 12:42 am
