
कोरोना में 16 महीने से संसद गायब, विचार विमर्श प्रक्रिया ठप
जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग और अंतरराष्ट्रीय राजनीति विज्ञान संघ की रिसर्च कमेटी के संयुक्त तत्वाधान में कोरोना महामारी से मुकाबला: प्रशासन और नागरिक समाज के समक्ष चुनौतियां विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि अमरीका के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय की प्रो एंजलिन चांग ने कहा कि कोरोना संकट मानव सभ्यता पर संकट है। सभी देशों के सम्यक प्रयासों से निदान संभव है। मुख्य वक्ता उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि के प्रो संजय लोढा ने कहा कि पिछले 16 महीने से संसद गायब है। विचार विमर्श की संपूर्ण प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। मजदूरों के पलायन में सरकारों ने मुंह मोड़ा। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी चोट पहुंची है लेकिन नागरिक समाज के प्रयास इस संदर्भ में अनुकरणीय है।
राजस्थान विवि के प्रो अशोक शर्मा ने नीति निर्माताओं द्वारा स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देने को कोरोना की भयावहता का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी के मामले भी यह स्पष्ट करते हैं कि नागरिक भी अपनी भूमिका का समुचित निर्वहन नहीं कर पाए। जेएनवीयू कुलपति प्रो पीसी त्रिवेदी, विभागाध्यक्ष प्रो जेएस शेखावत, समन्वयक प्रो मीना बरडिय़ा, समन्वयक डॉ दिनेश गहलोत, मुंबई के अनिल सुरेंद्र मोदी स्कूल की डॉ चारू भरूत ने विचार रखे।
Published on:
26 May 2021 04:09 pm
