
इंजन फेल होने की दोहरी मार झेल रहे यात्री
जोधपुर।
जोधपुर रेल मण्डल में इंजन फेल होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन दिनों, यात्रियों को तकनीकी खराबी के साथ जानवरों के इंजन से टकराने से फेल हो रहे इंजन की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। जानवर टकराने से इंजन क्षतिग्रस्त हो जाते है, और नया इंजन नहीं आने तक गाडि़या बीच रास्ते अटक जाती है। गौरतलब है कि जोधपुर रेल मण्डल में पिछले काफी समय से इंजन फेल होने के मामले बढ़े है, लेकिन अब जानवरों के टकराने से भी इंजन फेल होने के मामलें बढ़ रहे है। रेलवे की ओर से सुरक्षा के लिए प्रत्येक इंजन के आगे कैटल गार्ड लगाए गए है। अधिकांश घटनाओं में जानवरों के टकराने कैटल गार्ड टूट जाते है। एेसे में लोको पायलट दूसरा इंजन मंगाकर लगाते है। जोधपुर रेल मण्डल की स्थिति देखे तो 20 अक्टूबर तक 24 बार इंजन फेल होने की घटनाएं हो चुक है। इनमें से 12 बार तो केवल जानवरों के टकराने से इंजन फेल होने की घटनाएं हुई है।
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डेमू सबसे अधिक प्रभावित
रेलवे लाइन के किनारे जानवर के घास चरने के दौरान इंजन से टकराने के सबसे अधिक मामले डेमू रैक में हुए है। पिछले माह के रिकॉर्ड पर नजर डाले तो 8 बार डेमू जानवर के टकराने से बीच रास्ते अटकी, और दूसरा इंजन लगाकर गन्तव्य तक पहुंचना पड़ा।
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समयबद्धता प्रभावित हो रही
जोधपुर रेल मण्डल का मथानिया से जैसलमेर, बासनी से समदड़ी, बालोतरा से बाड़मेर, समदड़ी से भीलड़ी, पीपाड रोड से मेड़ता रोड व डेगाना से फुलेरा तक का मार्ग ग्रामीण क्षेत्र से घिरा हुआ है। इन क्षेत्रों में ग्रामीण अपने गाय-भैंस आदि जानवर रेलवे पटरियों के नजदीक चराने के लिए छोड़ देते है। ट्रेन आने के बाद भी जानवर पटरियों से नही हटते है और इधर-उधर दौडऩे लगते है। जानवर इंजन से टकरा जाते है और इंजन क्षतिग्रस्त हो जाते है। गाडिय़ां विलम्ब से चलती है और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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इस वर्ष अगस्त तक की स्थिति
उत्तर पश्चिम रेलवे के क्षेत्राधिकार में इस वर्ष अगस्त तक जानवरों के ट्रेनों के सामने आने की कुल 607 घटनाएं हुई। इससे करीब 905 ट्रेनें प्रभावित हुई है। जोधपुर मण्डल पर जानवरों के ट्रेनों के सामने आने की 142 घटनाएं हुई है। इसी प्रकार, सबसे ज्यादा घटनाएं जयपुर मण्डल पर 250, अजमेर मण्डल पर 120 तथा सबसे कम बीकानेर मण्डल पर 95 घटनाएं हुई है।
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रेलवे कार्यवाही करेगा
रेलवे ट्रेक पर जानवरों को खुला छोडऩे से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए रेल प्रशासन उन क्षेत्रों की पहचान कर, जहां इस प्रकार की घटनाएं अधिक होती है, वहां जागरूकता अभियान चलाएगा। पशुपालकों को पहले समझाया जाएगा व उसके बाद भी इस तरह की घटनाएं होने पर जानवरों के मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
तरुण जैन, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी
उत्तर पश्चिम रेलवे
Published on:
28 Oct 2018 10:26 pm
