
छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त तक लाॅकडाउन की खबर को सरकार ने बताया फेक
जोधपुर. कोरोना के संकट की इस घड़ी में एक ओर जहां जिला प्रशासन और नगर निगम जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है तो वही कई अवसरवादी लोग इस सेवा का अनुचित लाभ लेने से नहीं चूक रहे हैं। नगर निगम की ओर से शिकायतों के सत्यापन के दौरान ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
नगर निगम आयुक्त सुरेश कुमार ओला ने बताया कि भोजन वितरण की इस प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग भी हो रही है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए कंट्रोल रूम में शिकायत मिली कि बासनी इंड्रस्ट्रीयल 50 से अधिक श्रमिक काफी परेशान हैं। उन्होंने फैक्ट्री मालिक द्वारा वेतन नहीं देने और मकान मालिक की ओर से मकान खाली करवाने का दबाव बनाने की शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने कहा कि उन्हें निगम कर्मियों की ओर से मिलने वाले खाने की क्वाालिटी भी सही नहीं है। आयुक्त ने बताया कि सत्यापन के लिए लूणी नायब तहसीलदार वीरेंद्रसिंह शेखावत को मौके पर भेजा। नायब तहसीलदार ने देखा कि शिकायतकर्ता की भौतिक स्थिति आर्थिक रूप से सक्षम लग रही थी। शिकायतकर्ता रविंद्र सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की अवधि का वेतन नहीं दिया गया है।
श्रमिकों के साथ फैक्ट्री पहुंचे। जहां फैक्ट्री सुपरवाइजर ने बताया कि 4 अप्रेल को ही सभी श्रमिकों के खातों में वेतन भेज दिया गया। उपस्थित श्रमिकों ने भी इस बात की तस्दीक की। रविंद्र सिंह ने भी बाद में स्वीकार किया। मकान मालिक और फैक्ट्री के बीच एग्रीमेंट 31 मार्च को पूरा हो गया है लेकिन उससे बात हो गई है और लॉक डाउन के बाद यह एग्रीमेंट आगे बढ़ाया जाएगा।
इसके बाद रविंद्र सिंह ने झूठी शिकायत करना स्वीकार किया और ऐसी गलती नहीं दोहराने की बात कही। ये श्रमिक पर्याप्त राशन सामग्री होने और वेतन मिलने के बावजूद भी पिछले कई दिनों से यह सभी श्रमिक नगर निगम की ओर से दी जाने वाली भोजन वितरण सुविधा का लाभ ले रहे थे।
Published on:
12 Apr 2020 06:08 pm
