
राजस्थान में सत्ता संग्राम- धोरों में गहलोत की जादूगरी के आगे फीकी रही पायलट की उड़ान
जोधपुर. मारवाड़ की राजनीतिक नब्ज पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पकड़ पुरानी है। इस बार उनके समर्थकों को ही टिकट मिला और अधिकांश वे ही जीते। संभाग में कांग्रेस 16 सीटों जीती है, उनमें एक को छोडकऱ सभी गहलोत खेमे में हैं। सम्भाग में दलीय स्थिति की बात करें तो जोधपुर, बाड़मेर व जैसलमेर जिले के 19 में से 15 विधायक कांग्रेस के हैं। इनमें से मात्र हेमाराम चौधरी पायलट के खेमे में गए हैं। बाकी 14 गहलोत के साथ हैं। इसी तरह पाली, जालोर, सिरोही की चौदह में से मात्र एक सांचौर पर कांग्रेस को जीत मिली थी। वहां से जीते सुखराम विश्नोई गहलोत सरकार में वन मंत्री हैं। सिरोही से संयम लोढ़ा व पाली के मारवाड़ जंक्शन से खुशवीरसिंह जोजावर निर्दलीय जीते और गहलोत सरकार का समर्थन किया। इनमें से लोढ़ा खुलकर गहलोत के साथ हैं और खुशवीर का नाम एसीबी की पीई में आने के बाद उनकी कांग्रेस संबंद्धता खत्म हो गई है। भाजपा की सम्भाग में 14 सीटें हैं। इनमें से सर्वाधिक 11 पाली, जालोर, सिरोही में है। इन जिलों में उसे किसी चुनौती का खतरा नहीं है और कांग्रेस के पास वहां खोने के लिए कुछ नहीं है।
धोरों में वीरानी
संभाग के दोनों सीमावर्ती जिलों बाड़मेर-जैसलमेर में पूर्व मंत्री और बाड़मेर के गुढ़ामलानी से कांग्रेस के विधायक हेमाराम चौधरी जरूर पायलट के खेमे में गए हैं, लेकिन उनका अगला कदम पायलट के फैसले पर निर्भर करेगा। ऐसे में दोनों ही जिलों में कांग्रेस की राजनीति पर कोई खास फर्क पडऩा नजर नहीं आता। दोनों जिलों की 9 में से 8 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। जैसलमेर की दोनों सीटें कांग्रेस के पास हैं। इनमें से जैसलमेर के विधायक रूपाराम धणदे की पोकरण से विधायक व मंत्री सालेह मोहम्मद से अनबन ने पायलट से नजदीकी बढ़ाई थी, लेकिन अब वह स्थिति नहीं है। बाड़मेर में हेमाराम के अलावा राजस्व मंत्री हरीश चौधरी समेत सभी 6 विधायक गहलोत समर्थक ही हैं। भाजपा का एक मात्र विधायक हमीरसिंह भायल (सिवाणा) है और वह मौजूदा राजनीति का कोई बड़ा फायदा उठाने की स्थिति में नहीं दिखती।
मारवाड़-गोड़वाड़ तो पहले ही खाली
संभाग के पाली, जालोर व सिरोही को मिलाकर बना मारवाड़-गोड़वाड़ क्षेत्र किसी जमाने में कांग्रेस का गढ़ रहा, लेकिन आज कांग्रेस इस इलाके में पूरी तरह खाली है। इलाके की चौदह विधानसभा सीटों में से कांग्रेस के खाते में मात्र एक जालोर की सांचौर सीट है। वहां से जीते सुखराम विश्नोई गहलोत सरकार में वन मंत्री हैं। इनके अलावा सिरोही से संयम लोढ़ा व पाली के मारवाड़ जंक्शन से खुशवीरसिंह जोजावर निर्दलीय हैं। लोढ़ा खुलकर गहलोत का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के पास इस इलाके में खोने के लिए कुछ नहीं है। संगठनात्मक स्तर पर जरूरी पाली के जिलाध्यक्ष चुन्नीलाल चाड़वास ने इस्तीफा दिया है। जालोर के जिलाध्यक्ष समरजीत सिंह भी पायलट के नजदीकी हैं, लेकिन कोई खास फर्क पड़ता नजर नहीं आता। भाजपा को हमेशा इस इलाके में कांग्रेस की आपसी लड़ाई का फायदा मिला है और पिछले चुनाव में भी उसने 11 सीटें अपनी झोली में डाली थी। मौजूदा हालात में उसे चुनौती मिलती नजर नहीं आती।
Published on:
16 Jul 2020 12:56 pm
