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‘जोधपुर नजरबंदियों’ के मुआवजे पर सियासत

- सभी छूट गए लेकिन इसके बाद कहलाए जोधपुर नजरबंदी- हथियार आज भी पड़े हैं जेल में

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‘जोधपुर नजरबंदियों’ के मुआवजे पर सियासत

ऑपरेशन ब्लू स्टार

- पांच साल रहे थे जोधपुर सेंट्रल जेल में
- ३६५ लोगों को लाया गया था जोधपुर जेल

जोधपुर.

ऑपरेशन ब्लू स्टार में नजरबंद रहे लोगों का मुआवजा मांगना और लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद पंजाब सरकार के मुख्यंमत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का बयान इन दिनों काफी चर्चा में है। केन्द्र सरकार के मुआवजा देने में पीछे हटने के बाद इस मामले में सियासत तेज हो गई है। ऑपरेशन ब्लू स्टार का जोधपुर से कनेक्शन रहा है। जिन लोगों को ३४ साल पहले पकड़ा गया था उन्हें आज भी ‘जोधपुर नजरबंदियों’ के नाम से जाना जाता है।
जोधपुर की सेंट्रल जेल में पांच साल तक इन बंदियों को रखा गया था। १९८९ में पंजाब सरकार से समझौते के बाद इन लोगों को छोड़ दिया गया था। लेकिन इसके बाद से सभी लोग जोधपुर नजरबंदी ही कहलाए। इन ३६५ जोधपुर नजरबंदियों में से २२४ लोगों ने यातनाओं का मुआवजा मांगा। लेकिन निचली अदातल में यह केस हार गए। इसके बाद आगे ४० लोगों ने जिला एवं सेशन न्यायाधीश में अपील की। जिस पर फैसला जोधपुर नजरबंदियों के हक में आया और प्रत्येक को ४ लाख रुपए ब्याज सहित देने के आदेश दिए। न्यायालय ने इस मुआवजा भुगतान में केन्द्र और राज्य सरकार दोनों को ५०-५० प्रतिशत अंशदान के आदेश दिए। केन्द्र सरकार की ओर से इसमें पंजाब-हरियाणा कोर्ट में अपील कर दी गई। जब केन्द्र सरकार द्वारा मुआवजा नहीं देने की बात सामने आई तो पंजाब के मुख्यमंत्री ने अपने स्तर पर ही यह अंशदान देने की बात कही है।

जोधपुर जेल की यातनाओं का हवाला

अपने मुआवजा कारणों में इन नजरबंदियों ने बताया कि ऑपरेशन में इन्हें पकडऩे के दौरान पहले किसी केन्द्रीय विद्यालय में बंद रखा और इसके बाद जोधपुर जेल में ले जाया गया। दोनों ही स्थानों पर इनको यातनाएं दी गई और बुरा बर्ताव किया गया। इसी का मुआवजा ये लोग मांग रहे हैं।

पांच साल से ज्यादा रहे और कहलाए जोधपुर नजरबंदी
१९८४ में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान पकड़े गए ये लोग जोधपुर जेल लाए गए थे। इनको पांच साल तक यहां रखा गया। इसके बाद १९८९ से १९९१ के बीच अलग-अलग समय में इनको पंजाब सरकार के साथ हुए समझौते के बाद छोड़ा गया।

अब भी दो कमरों में हथियार

इन जोधपुर नजरबंदियों से उस समय बड़ी संख्या में हथियार भी बरामद किए गए थे। यह हथियार आज भी सेंट्रल जेल के दो कमरों में रखे हुए हैं। इनकी रखवाली के लिए जेल प्रशासन द्वारा ३ गार्ड की नियमित ड्यूटी लगाई जाती है। एेसे में हर माह डेढ़ लाख रुपए खर्च होते हैं। जब से यह हथियार पड़े हैं तब से इनकी सुरक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं।

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जोधपुर जेल में ऑपरेशन ब्लू स्टार के कई लोग लाए गए थे। वर्तमान में कोई नहीं है लेकिन हथियार पड़े हैं। पंजाब के बंदियों की जानकारी हमसे हर माह मांगी जाती है जो कि हम शून्य भेजते हैं।

- विक्रमसिंह, उप महानिरीक्षक जेल, जोधपुर।