ऑपरेशन ब्लू स्टार में नजरबंद रहे लोगों का मुआवजा मांगना और लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद पंजाब सरकार के मुख्यंमत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का बयान इन दिनों काफी चर्चा में है। केन्द्र सरकार के मुआवजा देने में पीछे हटने के बाद इस मामले में सियासत तेज हो गई है। ऑपरेशन ब्लू स्टार का जोधपुर से कनेक्शन रहा है। जिन लोगों को ३४ साल पहले पकड़ा गया था उन्हें आज भी ‘जोधपुर नजरबंदियों’ के नाम से जाना जाता है।
जोधपुर की सेंट्रल जेल में पांच साल तक इन बंदियों को रखा गया था। १९८९ में पंजाब सरकार से समझौते के बाद इन लोगों को छोड़ दिया गया था। लेकिन इसके बाद से सभी लोग जोधपुर नजरबंदी ही कहलाए। इन ३६५ जोधपुर नजरबंदियों में से २२४ लोगों ने यातनाओं का मुआवजा मांगा। लेकिन निचली अदातल में यह केस हार गए। इसके बाद आगे ४० लोगों ने जिला एवं सेशन न्यायाधीश में अपील की। जिस पर फैसला जोधपुर नजरबंदियों के हक में आया और प्रत्येक को ४ लाख रुपए ब्याज सहित देने के आदेश दिए। न्यायालय ने इस मुआवजा भुगतान में केन्द्र और राज्य सरकार दोनों को ५०-५० प्रतिशत अंशदान के आदेश दिए। केन्द्र सरकार की ओर से इसमें पंजाब-हरियाणा कोर्ट में अपील कर दी गई। जब केन्द्र सरकार द्वारा मुआवजा नहीं देने की बात सामने आई तो पंजाब के मुख्यमंत्री ने अपने स्तर पर ही यह अंशदान देने की बात कही है।