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नए निगम पर कब्जे की कशमकश

- सीएम गहलोत व केंद्रीय मंत्री शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर  
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नए निगम पर कब्जे की कशमकश

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जोधपुर. पहली बार बने नगर निगम उत्तर के लिए गुरुवार को होने वाले चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। निगम के 80 वार्डों में बहुमत हासिल करने के लिए दोनों ही पार्टियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है, ताकि नए बन रहे निगम पर कब्जा किया जा सके। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर है।
गहलोत सीधे तौर पर चुनाव से दूर हैं, लेकिन अधिकांश प्रत्याशियों का चयन उनकी हरी झंडी पर ही किया गया है। जबकि भाजपा में शेखावत प्रत्याशी चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक कमान सम्भाले हैं। निगम उत्तर के क्षेत्र में सीएम गहलोत के निर्वाचन क्षेत्र के अधिकांश वार्ड आ रहे हैं। सूरसागर, प्रतापनगर, मंडोर, महामंदिर व बीजेएस कॉलोनी जैसे बाहरी और नागौरी गेट, उम्मेद चौक तथा परकोटे के भीतरी इलाकों में बंटे 80 वार्डों में 296 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं।

मुद्दे सडक़, सफाई, सीवरेज

चुनाव में मुख्य रूप से सडक़, सफाई व सीवरेज के मुद्दे ही उभर कर सामने आए हैं। कई प्रत्याशियों ने वार्ड की समस्याओं के अनुरूप अपने संकल्प पत्र भी जारी किए हैं। भाजपा ने स्कूल फीस में छूट देने वाले स्कूलों को यूडी टैक्स में छूट जैसा वादा किया है तो कांग्रेस ने एलिवेटेड रोड जैसी राज्य सरकार की घोषणा को भी लागू करने का वादा किया है।

छोटे वार्ड, कम मतदाता

निगम में वार्डों का आकार छोटा होने के साथ-साथ मतदाताओं की संख्या भी कम ही है। निगम उत्तर के लिए बनाए गए 625 मतदान केंद्रों पर प्रत्येक में औसतन 800 मतदाता हैं। हालांकि स्थानीय चुनाव में हर बार मतदान प्रतिशत बढ़ता है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते ज्यादा वोटिंग करवाना भी पार्टियों के लिए चुनौतीपूर्ण है।

एक दूसरे को पटखनी की कोशिश
पिछली बार जब एक ही निगम था तो भाजपा ने बोर्ड बनाया था। इस बार भाजपा जहां बोर्ड बरकरार रखने के साथ-साथ नए बने निगम में भी कब्जा करने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस की कोशिश पिछली बार हाथ से निकला बोर्ड दुबारा हथियाने और नए निगम पर काबिज होने की है। हालांकि टिकट बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों ही पार्टियों को बागियों व भितरघात का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन दोनों ही दल एक दूसरे को पटखनी देने की पूरी तैयारी में हैं।

भाजपा आक्रामक, कांग्रेस मौन

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा हालांकि ज्यादा आक्रामक नजर आई है। पार्टी के नेताओं ने लगातार राज्य सरकार की विफलताओं को लेकर हल्ला बोला है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व कैलाश चौधरी के अलावा राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गहलोत, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रसन्न चंद मेहता, पूर्व महापौर घनश्याम ओझा व जिलाध्यक्ष देवेंद्र जोशी ने चुनाव प्रचार की कमान सम्भाली है। जबकि कांग्रेस की तरफ से आक्रामक प्रचार कम ही नजर आया। यहां तक कि पार्टी के नेता पिछली बार केंद्र व राज्य दोनों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद जोधपुर को स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं करवा पाने का मुद्दा भी प्रमुखता से नहीं उठा पाए। प्रमुख नेताओं में जिला प्रभारी मंत्री महेंद्र चौधरी व एआइसीसी की ओर से पर्यवेक्षक बनाए गए बीपी सिंह भी टिकटों के लिए रायशुमारी के बाद नजर नहीं आए। शहर विधायक मनीषा पंवार, जिलाध्यक्ष सईद अंसारी, पूर्व जेडीए चेयरमैन राजेंद्रसिंह सोलंकी व सूरसागर से विधानसभा चुनाव हारे कांग्रेस नेता प्रोफेसर अय्यूब अपने अपने इलाकों में ही सिमटे नजर आए। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे वैभव गहलोत जरूर दो दिन से प्रचार में जुटे हैं।

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