
लोगों की थाली से गायब हुई दाल, कई सब्जियों के दाम भी आसमान पार!
अमित दवे/जोधपुर. घरेलू बाजार में एक आम भारतीय द्वारा खाई जाने वाली दाल महंगाई के चूल्हे पर उबल रही है। इसकी वजह राजस्थान व मध्यप्रदेश में बारिश से मंंूग व उडद की फसल का खराब होना है। केंद्र सरकार द्वारा मूंग-उड़द और अरहर का आयात बंद करने और घरेलू बाजार में बढ़ती मांग ने भी दालों में तेजी को हवा दी है। पिछले एक पखवाड़े के मुकाबले उड़द मोगर में 20-40 रुपए व मूंग दाल में 10-15 रुपए तेजी आई है। दालों में आए उबाल से आमजन की थाली से दाल भी गायब होने लगी है।
दलहन उद्योग पर टैक्स की मार
दाल के बढ़ते भावों का एक अन्य कारण प्रदेश में दालों पर दोहरा मंडी शुल्क भी है। एक तो उद्यमी कच्चा माल (यथा- मूंग, उड़द आदि) कृषि मंडी शुल्क चुका कर ला रहा है। दूसरी तरफ राज्य सरकार भी कृषि मंडी शुल्क वसूलती है। वर्ष 1963 से 2005 तक राज्य के बाहर से माल लाने पर उद्यमी कृषि मंडी शुल्क का भुगतान कर माल लाते थे, इस पर उनसे यहां पर राज्य सरकार की ओर से मंडी शुल्क नहीं लिया जाता था। राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2005 से मंडी शुल्क लागू करने से जोधपुर सहित राज्य का दलहन उद्योग प्रभावित हुआ है।
प्याज-लहसुन में भी तेजी
प्याज-लहसुन के भावों में भी तेजी बनी हुई है। प्याज-लहसुन के होलसेल विक्रेता शेरसिंह सांखला ने बताया कि बारिश से महंगे हुए प्याज-लहसुन ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। बारिश से प्याज की नई फसल खराब हो गई है। इस वजह से आवक कम होने से दामों में तेजी आ गई है। वर्तमान में 40 से 45 रुपए होलसेल और 45 से 65 रुपए रिटेल में बिक रहे है। किसानों ने इस बार लहसुन की बुवाई में रूचि नहीं दिखाई। इससे लहसुन का उत्पादन प्रभावित हुआ व इसका असर लहसुन के भावों में देखने को मिल रहा है। लहसुन होलसेल में जहां 120-140 रुपए वहीं रिटेल में 150-200 रुपए किलो तक बिक रहे है। पिछले सात दिनों में नए आलू सहित अन्य सब्जियों के भावों में भी वृद्धि हुई है।
दालों के भाव, प्रति किलो में (होलसेल)
दाल——- 20 दिन पहले-- वर्तमान
दाल चना - 47-50 - 53-57
मूंग मोगर - 75-85 - 88-95
मूंग दाल - 65-70 - 78-81
उड़द दाल - 71- 95
उड़द मोगर - 70-90 - 103-130
काबली चना - 50-60 - 60-70
मोठ मोगर - 62- 65 - 82-86
अरहर दाल - 75-80- 85-90
मसूर मल्का - 50-52-- 53-56
सरकार आयात शुरू करे
बारिश की वजह से मूंग-उडद की फसल खराब हो गई है। सरकार को मूंग-उड़द के आयात के द्वार खोलने चाहिए। अन्यथा दलहन उद्योग बर्बाद हो जाएगा।
अमरचंद जैन, दाल मिल संचालक व होलसेल विक्रेता
Updated on:
12 Nov 2019 11:56 am
Published on:
12 Nov 2019 11:56 am
