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15 साल पुराने नकारा वाहनों से हो रही 12 जिलों के वन्यजीवों की रक्षा

15 साल पुराने नकारा वाहनों से हो रही 12 जिलों के वन्यजीवों की रक्षा हर साल एक हजार घायल वन्यजीवों के रेस्क्यू ऑपरेशन में भी अवधि पार वाहनों का उपयोग
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15 साल पुराने नकारा वाहनों से हो रही 12 जिलों के वन्यजीवों की रक्षा

15 साल पुराने नकारा वाहनों से हो रही 12 जिलों के वन्यजीवों की रक्षा

जोधपुर. हर साल जोधपुर जिले में करीब एक हजार से अधिक घायल वन्यजीवों को बचाने और शिकार की रोकथाम के लिए 15 साल पुराने दो खस्ताहाल वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। जोधपुर वन्यजीव मंडल की रेस्क्यू टीम को जोधपुर जिले के अलावा पूरे जोधपुर संभाग, बीकानेर संभाग के जिलों के साथ नागौर और उदयपुर संभाग की सीमा से सटे क्षेत्रों में वन्यजीवों के रेस्क्यू ऑपरेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछले लंबे अर्से से जोधपुर की रेस्क्यू टीम जोधपुर, बीकानेर व उदयपुर संभाग से सटे जिलों में कई रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम भी दिया है।

वनविभाग के अधिकारी और वन्यजीव प्रेमी पिछले कई वर्षों से मुख्य वन संरक्षक, वन मंत्री और मुख्यमंत्री से जिले के वन्यजीवों को बचाने के लिए नए रेस्क्यू वाहनों की लगातार मांग कर रहे है लेकिन सरकार ने अभी तक कोई पहल नहीं की है।
-2006 में आबू से लाया गया था रेस्क्यू वाहन

वन्यजीवों को बचाने में प्रयुक्त दो रेस्क्यू वाहनों में एक वाहन (बोलेरो कैम्पर) संख्या आरजे 24 जीए 660 को माउंट आबू से वर्ष 2006 में लाया गया था। वर्ष 2007 में बिश्नोई टाइगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था की ओर से वन विभाग को रेस्क्यू वाहन भेंट किया था। लेकिन पिछले करीब 15 वर्षों में दोनों रेस्क्यू वाहन लाखों किलोमीटर चलने के बाद नकारा हो चुके है। कोरोना लॉकडाउन में दोनों वाहन पूरी तरह जवाब देने के बाद उनके रंगरोगन और मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है।

माचिया में धूल फांक रहा 32 लाख का रेस्क्यू वाहन

जिले के घायल वन्यजीवों को बचाने के लिए खास तौर पर बनवाया गया रेस्क्यू वाहन पिछले 10 सालों से उपवन संरक्षक वन्यजीव कार्यालय के अधीन माचिया पार्क परिसर में धूल फांक रहा है। करीब 32 लाख की लागत से निर्मित विशेष रेस्क्यू वाहन घायल चिंकारों-काले हरिणों को रेस्क्यू करने के लिए अनुपयोगी साबित हुआ है। जोधपुर ग्रामीण क्षेत्रों से श्वान के हमलों , सड़क सड़क दुर्घटना व अन्य कारणों से घायल चिंकारा व काला हिरण सहित छोटे रोज के बच्चों की हर दिन घटनाएं सामने आती है। घायल वन्यजीवों की सूचना तथा शिकार आदि की घटना होने पर रेस्क्यू टीम अथवा उडऩदस्ता समय पर नहीं पहुंचने से पर्यावरण प्रेमी रास्ते तक जाम कर देते है।

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