
जोधपुर .कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी ने 25 नवंबर 2013 को जोधपुर के पुराने स्टेडियम में कांग्रेस की चुनावी सभा संबोधित की थी। राहुल दस साल पहले मेहरानगढ़ दुखांतिका के समय और पांच वर्ष पहले चुनावी सभा के लिए जोधपुर आए थे। उनके दौरे लिए एसपीजी ने कई दिन पहले जोधपुर में डेरा डाल लिया था। यहां तक कि सुरक्षा के मद्देनजर मंच में भी बदलाव किया था। तब राहुल राहुल की आवाजें थम नहीं रही थीं। पेश हैं अतीत के झरोखे से :
एेसा था माहौल
उस दिन राहुल गांधी के स्टेडियम में पहुंचते ही लोगों ने खड़े हो कर उनका अभिवादन किया था और वे हाथ हिला कर ‘राहुल-राहुल कहते रहे थे। उनके भाषण के समय मंच के एक ओर से लोग बार-बार जोर-जोर से’राहुल राहुल के नारे लगा रहे थे। महिलाओं ने भी बार-बार राहुल गांधी और अशोक गहलोत जिंदाबाद के नारे लगाए थे। राहुल गांधी भाषण के बाद जैसे ही वे रेस्ट करने के लिए शामियाने में बने अस्थाई रेस्ट हाउस में आराम करने गए, वैसे ही लोग समूह में बार-बार जोर-जोर से ‘राहुल-राहुल कहते हुए मंच की ओर बढऩे लगे थे। इस पर सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकने के लिए दौड़े थे और जब उनके राहुल को पुकारने के स्वर नहीं रुके और उन्हें उनके पास आने के लिए मजबूर कर दिया था, तब राहुल बाहर आए थे और उनके पास आ कर उनसे मिले थे तभी लोगों को चैन मिला था और उसके बाद राह़ुल-राहुल की आवाजें भी थमी थीं।
एक झलक देखने की ललक और संबोधन
उन्होंने शाम 4.5 बजे से 4.17 तक उम्मेद राजकीय स्टेडियम में कांगे्रस की चुनावी सभा को संबोधित किया था। तब लोगों में इंदिरा गांधी के पोता और राजीव गांधी के बेटे की एक झलक देखने की ललक थी। लोग घंटों सुबह से चिलचिलाती धूप में उनका इंतजार करते हुए देखे गए थे। सूरज ढलने के समय लंबे इंतजार के बाद जब चार घंटे बाद वे दोपहर 3.12 बजे सभा स्थल पहुंचे थे। राहुल की एक झलक देख लोगों के सब्र का बांध टूट गया और बार-बार बेकाबू होने लगे थे,मगर पुलिस ने उन्हें थाम लिया था। उस दिन नजारा एेसा था कि लोगों को राहुल गांधी की एक झलक नसीब हुई तो उन्होंने बार-बार राहुल-राहुल कह कर उन्हें अपना प्यार दिया और बस एक झलक देख खुशी से उनकी आंखें छलछला आई थीं।
उत्सुकता थी कि दिखने में कैसे हैं राहुल ?
आम लोगों में से कुछ पुराने लोगों में यह उत्सुकता भी थी कि इंदिरा गांधी का पोता और राजीव गांधी का बेटा देखने में कैसा है? हालांकि राहुल इससे पहले भी एक बार जोधपुर आए थे, मगर वह मेहरानगढ़ दुखांतिका के समय का दुख भरा माहौल था और उस वक्त वे भी जल्दी में आए थे और हादसा प्रभावितों के अलावा आम आदमी भी उनसे मिल नहीं सके थे, मगर यह अवसर वे चूकना नहीं चाहते थे, क्यों कि राहुल गांधी की उस चुनाव के दौरान मारवाड़ में वह पहली और पीसीसी के कार्यक्रम के अनुसार अंतिम सभा थी।
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