
कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब, महिलाओं के लिए शादी की न्यूनतम आयु 18 साल क्यों?
जोधपुर. पुरुष और महिला की शादी की उम्र कानूनन अलग रखे जाने को भेदभावपूर्ण बताते हुए दायर जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति और न्यायाधीश डॉ.पुष्पेंद्रसिंह भाटी की खंडपीठ मेें याचिकाकर्ता अब्दुल मन्नान ने कहा कि कानूनन पुरुष के लिए शादी की उम्र 21 और महिला के लिए 18 वर्ष निर्धारित है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
यह संविधान प्रदत्त लैंगिक समानता के अधिकार के विपरीत है। लॉ कमीशन ने भी अपनी रिपोर्ट में माना है कि महिला और पुरुष की उम्र में अंतर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और यह रूढिय़ों पर आधारित है। दुनिया के 125 देशों में महिला और पुरुषों के शादी की कानूनी उम्र में अंतर नहीं है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी बाल विवाह पर राष्ट्रीय सम्मेलन में न्यूनतम आयु में एकरूपता की सिफारिश की थी। याची ने कहा कि महिलाओं को 18 साल की उम्र में स्कूल खत्म करने के बाद पढ़ाई या रोजगार के लिए स्वतंत्र होने का मौलिक अधिकार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जो महिलाएं 20 साल की उम्र से पहले गर्भवती हो जाती हैं, वे कम प्रसव, उच्च प्रसव के जोखिम का सामना करती हैं।
कई रिसर्च पेपर बताए
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने पूर्व में भी इस जनहित याचिका पर सुनवाई की थी और याचिकाकर्ता को बायोलॉजिकल ऐज को लेकर रिसर्च पूरी करने को कहा था। बुधवार को सुनवाई के दौरान याची ने ऑक्सफोर्ड एकेडमिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए।
Published on:
06 Feb 2020 02:37 pm
