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विधवा अभ्यर्थियों को 31 अक्टूबर तक नियुक्ति देने के निर्देश, पढ़ें कोर्ट संबंधी खबरें

अतिरिक्त महाधिवक्ता करणसिंह राजपुरोहित ने कहा कि कुछ वर्गों को अभी नियुक्तियां दी जानी शेष हैं। हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में विधवाओं से सम्बंधित एक याचिका विचाराधीन है, जिसमें निर्णय सुरक्षित होने से नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
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The hustle and bustle in the High Court returned after 120 days

The hustle and bustle in the High Court returned after 120 days

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने नर्स ग्रेड द्वितीय भर्ती के मामले में याचिकाकर्ता सहित अन्य विधवा अभ्यर्थियों को 31 अक्टूबर से पहले नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश दिनेश मेहता की एकलपीठ में याचिकाकर्ता जोधपुर निवासी निधि प्रजापत की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने कहा कि याचिकाकर्ता को 52.29 अंक प्राप्त हुए और अंतिम मेरिट लिस्ट में उसका नाम होने के बावजूद नियुक्ति नहीं दी गई।

अतिरिक्त महाधिवक्ता करणसिंह राजपुरोहित ने कहा कि कुछ वर्गों को अभी नियुक्तियां दी जानी शेष हैं। हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में विधवाओं से सम्बंधित एक याचिका विचाराधीन है, जिसमें निर्णय सुरक्षित होने से नियुक्ति नहीं दी जा सकती। एकलपीठ ने चिकित्सा विभाग को इन निर्देशों के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया कि जयपुर में विचाराधीन याचिकाओं के हद तक पद सुरक्षित रखते हुए बाकी पदों पर विधवाओं को 31 अक्टूबर से पहले नियुक्ति प्रदान की जाए।

कोर्ट के हस्तक्षेप से अब रिहा हो पाएगी फेफा देवी
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब नौ महीने पूर्व स्थायी पैरोल की स्वीकृति के बावजूद केवल दो पारिवारिक जमानतें नहीं होने के कारण सलाखों के पीछे रह रही एक चालीस वर्षीय महिला को व्यक्तिगत बंध पत्र पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश विजय बिश्नोई तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता फेफा देवी उर्फ पदमादेवी की याचिका पर सुनवाई के बाद निर्देश दिए कि एक लाख रुपए के व्यक्तिगत बंध पत्र पर उसे स्थायी पैरोल पर रिहा किया जाए। याची की ओर से बताया गया कि वह पिछले पंद्रह साल से जेल में है और वर्तमान में सांगानेर स्थित ओपन जेल में रह रही है।

मूलत: भीलवाड़ा निवासी याची को राज्य स्तरीय पैरोल कमेटी ने पिछले साल 24 नवंबर को पचास-पचास हजार रुपए की दो जमानतें तथा पचास हजार रुपए के व्यक्तिगत बंध पत्र पर स्थायी पैरोल पर रिहा करने का निर्णय लिया था, लेकिन याची इसका लाभ इसलिए नहीं उठा पाई कि उसके परिवार के सदस्यों ने दो जमानतें देने से इनकार कर दिया। इस पर खंडपीठ ने दो जमानतों की शर्त में शिथिलता देते हुए केवल एक लाख रुपए के व्यक्तिगत बंध पत्र पर स्थायी पैरोल पर रिहा करने के आदेश दिए।

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