जयकुमार भाटी/जोधपुर। प्राचीन काल में जापान और चीन में वस्त्रों व कागज पर छपाई के लिए वुडकट प्रिंटिंग की उत्पत्ति हुई थी। वहीं भारत में इसकी शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता से पहले हो गई थी। जिसमें पारंपरिक प्रिंट मेकिंग तकनीकों में वुडकट, लोहे एवं जिंक पर कार्विंग और लिथोग्राफी शामिल है। ऐसे में मेवाड़ की बेटी रंजना जांगिड़ मारवाड़ में रहकर इस प्राचीन कला को जीवित रखने का उत्कृष्ट कार्य करने के साथ युवाओं को सिखाने में जुटी है। उदयपुर की रहने वाली रंजना इस पेंटिंग को बनाने वाली एकमात्र महिला आर्टिस्ट है, जो शादी के बाद जोधपुर में बस गई। उनकी बनाई वुडकट पेंटिंग लाखों रुपए में बिकने के साथ युवाओं को वर्कशॉप के माध्यम से इस कला को सीखा रही है।
निशुल्क सीखा रही वुडकट कला
उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से कला विषय में एमए करने वाली रंजना ने पिछले 14 वर्ष में कला के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। शादी के बाद जोधपुर रहने वाली रंजना पेंटिंग, ग्राफिक, प्रिंटमेकिंग के साथ लकड़ी में स्कल्पचर भी बनाती है। हाल ही में इन्हें फरवरी 2023 में आर्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया मुंबई से बेस्ट प्रिंट मेकिंग वर्क के लिए नेशनल अवार्ड से नवाजा गया। राजस्थान लिटरेचर फेस्टिवल में ललित कला अकादमी की ओर से आमजन के समक्ष लाइव प्रिंट मेकिंग डेमोंस्ट्रेशन के लिए रंजना का चयन भी हुआ। वे प्रिंट मेकिंग तकनीक के प्रति लोगों के मन में जागरूकता को देखते हुए निशुल्क प्रिंट मेकिंग वर्कशॉप का आयोजन करती है। रंजना कई वर्षों से आर्ट एंड क्राफ्ट की कक्षाएं संचालित करने के साथ महिलाओं व बच्चों को प्रिंट मेकिंग का निशुल्क प्रशिक्षण भी दे रही है। उन्होंने बताया कि इस वुडकट पेंटिंग को तैयार करने में कई दिन लगते हैं और अगर इसे अच्छी तरह से निष्पादित किया जाए तो यह 5 लाख रुपए तक में बिक सकती है।
आम पेंटिंग से महंगी वुडकट पेंटिंग
उन्होंने बताया कि प्रिंट मेकिंग में पहले चित्रों को लकड़ी पर उकेरा जाता है, फिर उन्हें दूसरी सतह पर स्याही अथवा अन्य रंगों का प्रयोग करके चम्मच की सहायता से रगड़ कर कागज पर उसका इंप्रेशन (छाप) लिया जाता है। जिससे सारी कलाकृति उस पर उकेरी जा सके। इसे 24 घंटे सूखने के बाद तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि वुडब्लॉक प्रिंट से तैयार वुडकट पेंटिंग की कीमत अन्य पेंटिंग से कहीं गुणा ज्यादा होती है। इसमें बहुत समय और मेहनत लगती है। वुडकट की एक साधारण पेंटिंग तीन से पांच हजार रुपए तक बिकती है। वहीं देश विदेश में इस तरह की पेंटिंग की कलाकृतियां तो पांच लाख रुपए तक बिकी हुई है।