
नृसिंह चतुर्दशी को स्वाति नक्षत्र में रवि योग रहेगा शुभ
जोधपुर. विष्णु अवतार भगवान नृसिंह का प्राकट्ययोत्सव वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाएगा। जूनी मंडी स्थित गंगश्यामजी के मंदिर के बाहर नृसिंह चतुर्दशी को दशकों से चला आ रहा परम्परागत 'मलूका मेलाÓ इस बार भी कोरोना महामारी के कारण नहीं हो सकेगा। इस बार मंगलवार के दिन स्वाति विशाखा नक्षत्र एवं वरियान- परिघ योग तथा तुला राशि के चंद्रमा की साक्षी में नृसिंह चौदस आ रही है । इस दिन रवि योग से पर्व का आरंभ होगा । धर्म शास्त्रों की मान्यता अनुसार सूर्यास्त काल (प्रदोषकाल) के समय व्यापिनी चतुर्दशी का व्रत करना चाहिए । इसमें भी यदि स्वाति नक्षत्र हो तो वह अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती है । धर्मशास्त्र एवं निर्णय सिंधु में नृसिंह पुराण, स्कंद पुराण के अलग - अलग अभिमत प्राप्त होते हैं। जिसमें इस व्रत को करने वाले सभी व्रतियों को समस्त प्रकार के संकट एवं पापों की निवृत्ति का मार्ग बताया गया है । इस दृष्टि से प्रतिवर्ष अपने कल्याण के लिए विधिवत इस व्रत को करने से जन्म जन्मांतर के पापों का क्षय एवं परिवार में कल्याण की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार करें पूजन
मध्यान्ह काल में हेमाद्री विधि से स्नान करके शुद्ध स्वरूप करने के बाद भगवान नृसिंह एवं लक्ष्मी की स्वर्ण मूर्ति को कलश पर स्थापित कर संकल्प लेकर विधिवत पंचोपचार षोडशोपचार पूजन करें। पूजन पश्चात पुन: कलश स्थापित करें। भिन्न-भिन्न प्रकार के नैवेद्य से भगवान नृसिंह लक्ष्मी को प्रसन्न करें। पं. मोहनलाल गर्ग ने बताया कि भगवान नृसिंह का पूजन, भजन करने से व्रती की मनोकामना पूरी होती है और असुर शक्तियों से रक्षा होती है। लक्ष्मी नृसिंह की मूर्ति को सुपात्र को दान करने से समस्त पापों का नाश होता है ।
Published on:
23 May 2021 09:56 am
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