9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

हर समय खड़ा रहता है मिलावट का रावण

बाजार में नकली घी, तेल, दूध, चायपत्ती, मसाले धड़ल्ले से बिक रहे हैं। कोई इन्हें खाकर बीमार पड़ जाए तो हालत और भी खराब, क्योंकि बाजार में जीवनरक्षक दवाएं तक नकली मिल रही हैं।
2 min read
Google source verification
Rawan of Adulteration sticks all the time

हर समय खड़ा रहता है मिलावट का रावण

यमुनाशंकर सोनी
बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण का दहन हर साल होता है लेकिन मिलावट का रावण हर समय खड़ा रहता है। मिलावट का सबसे ज्यादा कहर रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर पड़ रहा है।

बाजार में नकली घी, तेल, दूध, चायपत्ती, मसाले धड़ल्ले से बिक रहे हैं। कोई इन्हें खाकर बीमार पड़ जाए तो हालत और भी खराब, क्योंकि बाजार में जीवनरक्षक दवाएं तक नकली मिल रही हैं।


कृषि उपज मंडी (मंडोर) से पिछले दिनों 20 क्ंिवटल नारियल बूरा मिलावट के अंदेशे में जब्त किया गया। यह बूरा सुमेरपुर (पाली) से आया था। सितंबर में भी इसी फर्म के नारियल बूरे में चावल के आटे की मिलावट मिली थी। लालसागर स्थित एक मिल से मंगलवार को मिलावट के अंदेशे में सैंकड़ों किलो मिर्च, हल्दी और धनिया पाउडर के नमूने लिए गए हैं।

आशंका है कि कुछ अन्य मिलों पर भी मिलावटी मसाले तैयार किए जा रहे हैं। चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मई में कांकाणी क्षेत्र में मिलावटी मसाले पकड़े गए थे।


दीपावली पर हर घर में व्यंजन बनते ही हैं। महिलाएं इसे कुकिंग में अपनी क्रिएटिविटी प्रदर्शित करने का अवसर मानती हैं। दुकानदारों के लिए यह कमाई का सीजन होता है। इन दिनों घी-तेल, मावा, पनीर, दूध से लेकर सूखे मेवों और मसालों की मांग बढ़ जाती है। इसे पूरा करने के लिए बड़े से लेकर गली मोहल्ले तक के दुकानदार खाद्य सामग्री का स्टॉक करते हैं।


प्रतिष्ठित दुकानदार ग्राहक को अच्छी सामग्री उपलब्ध कराते हैं, वहीं कुछ दुकानदार कम गुणवत्ता या मिलावटी सामान थमा देते हैं। एक अनुमान के अनुसार मण्डोर मण्डी से प्रतिदिन करीब तीन हजार टिन देसी घी और खाद्य तेल के करीब साढ़े छह हजार टिन बिक जाते हैं।
घी और तेल की सबसे ज्यादा खपत मिठाई और नमकीन की दुकानों पर होती है।

शहर में इनकी करीब डेढ़ हजार दुकानें हैं। मावा कितना खपता है इसका पक्का अनुमान नहीं है।त्योहार पर काउंटर भी लग जाते हैं जिनके पास खाद्य सामग्री बेचने का लाइसेंस तक नहीं होता।


खाने में मिलावट रोकने के कानून के तहत दोषी को छह माह की जेल और नकद जुर्माना हो सकता है। लेकिन इसका क्रियान्वयन इतना ढीला है कि बहुत कम मामलों में ऐसा हो पाता है। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर निगाह रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम पर नमूने लेने, उनकी जांच कराने और मिलावट पाए जाने पर कोर्ट में चालान पेश करने की जिम्मेदारी होती है।

लेकिन जोधपुर शहर में सिर्फ दो खाद्य निरीक्षक हैं। रूटीन में इन पर हर माह दस सैम्पल लेने का जिम्मा होता है। त्यौहार के दिनों में लक्ष्य बढ़ जाता है।


नमूनों की जांच जोधपुर स्थित लैब में होती है। वहां एक एनालिस्ट है। उनके पास जयपुर का भी चार्ज है। नियमानुसार किसी भी नमूने की जांच रिपोर्ट 14 दिन में आनी चाहिए, ऐसा नहीं होता तो विभाग सर्कुलर जारी कर विलंब की सूचना देता है।

विभागीय मजबूरियां कुछ भी हों, सतर्क तो उपभोक्ताओं को ही रहना होगा। जरा सी सावचेती आपके और परिवार के स्वास्थ्य को नुकसान होने से बचा सकती है।
yamunashankar.soni@epatrika.com

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग